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मीटिंग के बीच DM ने अचानक छोड़ दी कुर्सी… सामने बैठ गया ‘मटरू’, VIDEO देख लोग बोले- दिल जीत लिया!

बागपत में DM अस्मिता लाल ने किसान बैठक के दौरान लंगूर “मटरू” को अपनी कुर्सी पर बैठाया। यह अनोखा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक बेहद दिलचस्प और दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है। कलेक्ट्रेट सभागार में किसान दिवस के मौके पर प्रशासनिक बैठक चल रही थी, जहां डीएम अस्मिता लाल और एसपी सूरज कुमार राय किसानों की समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान अचानक एक लंगूर, जिसे स्थानीय लोग “मटरू” के नाम से जानते हैं, सभागार में पहुंच गया। आमतौर पर ऐसी स्थिति में अफरा-तफरी मच जाती है, लेकिन यहां जो हुआ, उसने सभी को चौंका दिया और साथ ही लोगों का दिल भी जीत लिया।

DM ने छोड़ी कुर्सी, मटरू को बैठाया अपनी जगह

जैसे ही लंगूर मटरू डीएम के पास पहुंचा, अस्मिता लाल ने बेहद शांत और संवेदनशील व्यवहार दिखाया। उन्होंने बिना किसी डर या हड़कंप के अपनी कुर्सी छोड़ दी और मटरू को इशारे से वहां बैठने को कहा। हैरानी की बात यह रही कि मटरू भी मानो उनकी बात समझ गया और तुरंत कुर्सी पर जाकर बैठ गया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और किसान भी हैरान रह गए। कुछ देर तक पूरा माहौल हल्का-फुल्का और मुस्कुराहट भरा हो गया, जिसे लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया।

वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर तारीफों की बाढ़

इस अनोखे पल का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आया, वह तेजी से वायरल हो गया। लोग डीएम के इस व्यवहार की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे इंसानियत और पशु प्रेम की मिसाल बताया। किसी ने लिखा कि “ऐसे अधिकारी ही समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं”, तो किसी ने कहा कि “पद पर रहकर भी इतनी सरलता दुर्लभ है।” यह वीडियो न केवल मनोरंजक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि इंसानों और बेजुबानों के बीच समझ और संवेदनशीलता किस तरह का रिश्ता बना सकती है।

कुछ देर बाद हटाया गया मटरू, फिर शुरू हुई बैठक

हालांकि, कुछ देर बाद वहां मौजूद अधिकारियों ने मटरू को सभागार से बाहर निकाल दिया, ताकि बैठक को फिर से सामान्य तरीके से जारी रखा जा सके। इसके बाद डीएम और एसपी ने दोबारा किसानों की समस्याएं सुननी शुरू कीं। लेकिन इस बीच जो दृश्य सामने आया, उसने लोगों के मन में एक अलग ही छाप छोड़ दी। यह घटना प्रशासनिक कामकाज के बीच भी मानवीय भावनाओं की झलक दिखाती है और यह संदेश देती है कि संवेदनशीलता किसी भी पद से बड़ी होती है।

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