Nana Patekar Last Rites: अभिनेता नाना पाटेकर को गुरुवार रात महाराष्ट्र के पुणे स्थित उनके फार्महाउस पर अंतिम विदाई दी गई। पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों, फिल्मी हस्तियों और नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। लेकिन सुबह निधन के बाद रात में अंतिम संस्कार करने का फैसला क्यों लिया गया? उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने इसकी वजह बताई।
पुणे के फार्महाउस पर दी गई अंतिम विदाई
नाना पाटेकर (Nana Patekar) के अंतिम संस्कार के लिए पुणे के डोंजे स्थित फार्महाउस पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटकर लाया गया। इस दौरान मौजूद लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और ‘नाना पाटेकर अमर रहें’ के नारे लगाए। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देते हुए उन्हें तीन गन सैल्यूट भी दिए गए। बेटे मल्हार पाटेकर ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। परिवार के करीबी लोगों के अनुसार, नाना की इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार फार्महाउस पर ही किया जाए।
बेटे मल्हार ने बताई रात में अंतिम संस्कार की वजह
नाना पाटेकर (Nana Patekar) का अंतिम संस्कार उसी दिन रात में किए जाने को लेकर लोगों के मन में सवाल उठे। इस बारे में उनके बेटे मल्हार ने बताया कि अभिनेता का निधन सुबह हुआ था और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। इस दौरान उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। अंतिम विदाई के समय माहौल गमगीन था और प्रशंसक अपने पसंदीदा अभिनेता की एक झलक पाने के लिए पहुंचे थे।
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फिल्मी सितारों और नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
नाना पाटेकर (Nana Patekar) को अंतिम विदाई देने के लिए फिल्म जगत की कई हस्तियां पहुंचीं। इनमें जैकी श्रॉफ, साजिद नाडियाडवाला और अनिल शर्मा जैसे नाम शामिल रहे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अभिनेता को श्रद्धांजलि दी। उनके निधन की खबर से प्रशंसकों और फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा। बड़ी संख्या में लोग पोस्टर लेकर पहुंचे और अपने चहेते कलाकार को आखिरी विदाई दी।
दमदार अभिनय से बनाई थी अलग पहचान
1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र में जन्मे नाना पाटेकर (Nana Patekar) अपनी प्रभावशाली आवाज, दमदार संवाद अदायगी और अलग तरह के किरदारों के लिए पहचाने जाते थे। उन्होंने ‘परिंदा’, ‘यशवंत’, ‘अब तक छप्पन’, ‘नटसम्राट’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। उन्हें सिनेमा में योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उनके अभिनय ने कई पीढ़ियों के दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी। उनके निधन से भारतीय सिनेमा ने एक चर्चित और प्रतिभाशाली कलाकार को खो दिया।
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