Lula Election Victory: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए लूला को अपना प्रिय मित्र बताया। उन्होंने कहा कि वह भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और विकासशील देशों की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया। उनके संदेश में समावेशी, न्यायपूर्ण और टिकाऊ दुनिया बनाने की प्रतिबद्धता भी दिखाई दी। भारत और ब्राजील दोनों BRICS समूह के अहम सदस्य हैं, इसलिए लूला की जीत को दोनों देशों के आपसी संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
80 साल की उम्र में फिर राष्ट्रपति बनेंगे लूला
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लूला दा सिल्वा ने फ्लावियो बोल्सोनारो को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 99.97 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक लूला को 51.76 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 48.24 प्रतिशत वोट हासिल हुए। इस जीत के साथ लूला एक बार फिर ब्राजील की सत्ता संभालने जा रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर भी काफी खास रहा है। एक समय फैक्ट्री में काम करने वाले लूला ने मजदूर नेता के रूप में पहचान बनाई और बाद में राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह मजबूत की। वह 2003 से 2010 तक राष्ट्रपति रह चुके हैं। उनके दोबारा चुने जाने को ब्राजील की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
Heartiest congratulations to my dear friend, President Lula, on his remarkable re-election victory.
I look forward to working closely with him to further deepen and expand the multifaceted India-Brazil Strategic Partnership.
Together, we will continue to strengthen our cooperation across diverse sectors, advance the shared priorities of the Global South and work towards a more inclusive, equitable and sustainable world.
@LulaOficial
— Narendra Modi (@narendramodi) October 26, 2026
महंगाई, अपराध और भ्रष्टाचार रहे बड़े मुद्दे, फिर भी लूला पर जताया भरोसा
ब्राजील के चुनाव में महंगाई, रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों ने जनता को अपनी नीतियों के जरिए राहत देने का भरोसा दिलाया। फ्लावियो बोल्सोनारो ने अपराध पर सख्ती और खाद्य पदार्थों की कीमतों को कम करने जैसे मुद्दे उठाए, जबकि लूला ने सामाजिक कल्याण, आर्थिक समानता और राष्ट्रीय हितों पर जोर दिया। चुनावी मुकाबला बेहद करीबी रहा, लेकिन अंतिम नतीजों में लूला आगे निकल गए। उनकी जीत के बाद अब जनता की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। नई सरकार के सामने आर्थिक चुनौतियों से निपटने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और देश में सामाजिक असमानता कम करने जैसी जिम्मेदारियां होंगी।
भारत-ब्राजील संबंधों को मिलेगी नई दिशा?
लूला की जीत का असर केवल ब्राजील की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रह सकता। उनकी विदेश नीति में राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्र फैसलों और विकासशील देशों के बीच सहयोग को अहम स्थान मिला है। ऐसे में भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के नए अवसर बन सकते हैं। पीएम मोदी के संदेश से भी स्पष्ट है कि भारत दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है। BRICS जैसे मंचों पर भारत और ब्राजील वैश्विक आर्थिक व्यवस्था तथा विकासशील देशों की भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर साथ काम कर सकते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं को ठोस परिणामों में बदलना दोनों देशों की सरकारों की नीतियों और आपसी बातचीत पर निर्भर करेगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि लूला के नए कार्यकाल में भारत-ब्राजील साझेदारी कितनी आगे बढ़ती है।
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