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8 महीने तक गड्ढे में जमीन के नीचे छिपा रहा यूक्रेनी सैनिक, खुद काटना पड़ा पैर, फिर ऐसे हुआ चमत्कारिक रेस्क्यू

यूक्रेनी सैनिक कोस्तियांतिन व्लासेंको करीब 8 महीने तक एक गड्ढे में जिंदगी की जंग लड़ते रहे। घायल पैर खुद काटने के बाद उन्हें 15 किलोमीटर दूर ड्रोन से रेस्क्यू किया गया। जानें पूरी कहानी।

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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। 49 वर्षीय यूक्रेनी सैनिक कोस्तियांतिन व्लासेंको ने करीब आठ महीने तक बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी जान बचाई। वह एक वीरान स्कूल के बॉयलर के नीचे बने गड्ढे में छिपे रहे। आसपास रूसी ड्रोन मंडराते थे, जिससे बाहर निकलना बेहद खतरनाक था। उनके साथ मौजूद सैनिक की मौत हो चुकी थी और मदद पहुंचाने का रास्ता भी आसान नहीं था। हालात ऐसे थे कि उन्हें निकालने के लिए भेजे गए दो रोबोट भी नष्ट हो गए। जमीन पर वाहन भेजना संभव नहीं था। ऐसे में व्लासेंको को सुरक्षित निकालने की उम्मीद लगातार कमजोर पड़ रही थी। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और किसी तरह जीवित रहने की कोशिश करते रहे।

ड्रोन हमले में बुरी तरह घायल हुए, जान बचाने के लिए खुद काटना पड़ा पैर

यूक्रेनी सैनिक व्लासेंको के मुताबिक, एक दिन रूसी ड्रोन ने उनकी स्थिति का पता लगा लिया और हमला कर दिया। इस हमले में उनका बायां पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। दूसरे पैर की हालत भी लगातार बिगड़ती गई। चोट के कारण वह ठीक से चलने या रेंगने में भी असमर्थ हो गए थे। भोजन और जरूरी सामान लेने के लिए थोड़ी दूरी तक जाना भी उनके लिए मुश्किल बन गया। समय बीतने के साथ घाव की स्थिति गंभीर होती गई और हड्डी बाहर आने लगी। आखिरकार उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। अपनी जान बचाने की उम्मीद में उन्होंने एक ईंट का सहारा लिया और चाकू से अपना घायल पैर काट दिया। इस दर्दनाक कदम के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। रिपोर्टों के अनुसार, फरवरी में उनके साथी सैनिक की भी मौत हो गई थी। वह दिन उनके साथी का 50वां जन्मदिन था, जिससे यह घटना उनके लिए और भी दुखद बन गई।

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 खाने के पैकेट, दवाइयां और पत्नी की किताब बनी जीने की वजह

इतने लंबे समय तक अकेले रहना और हर वक्त हमले का खतरा झेलना यूक्रेनी सैनिक के लिए बड़ी चुनौती थी। यूक्रेनी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सेना ड्रोन के जरिए उनके पास नियमित अंतराल पर भोजन, दवाइयां, सिगरेट और मिठाइयां पहुंचाती थी। रेडियो संपर्क के कारण उन्हें यह एहसास बना रहा कि वह पूरी तरह अकेले नहीं हैं। उनके पास एक फोन भी पहुंचाया गया, जिसके जरिए आगे होने वाले बचाव अभियान के लिए निर्देश दिए गए। उनकी पत्नी ने उन्हें मशहूर लेखक स्टीफन किंग की एक किताब भी भेजी। मुश्किल समय में किताब पढ़ना उनके लिए मानसिक सहारा बना। व्लासेंको ने बताया कि किसी की आवाज सुन पाना भी उनके लिए खुशी की बात थी। इस दौरान उनकी सबसे बड़ी उम्मीद परिवार से दोबारा मिलने की थी। खास तौर पर वह अपनी बेटी से मिलने और उससे बात करने की इच्छा रखते थे।

 बड़े ड्रोन ने 15 किलोमीटर दूर पहुंचाया

काफी तैयारी और जोखिम के बाद यूक्रेनी सेना ने यूक्रेनी सैनिक व्लासेंको को निकालने के लिए एक विशेष अभियान तैयार किया। रिपोर्ट के मुताबिक, छह रोटर वाले बड़े ड्रोन की मदद से उन्हें सुरक्षित स्थान तक ले जाने की योजना बनाई गई। अक्टूबर की शुरुआत में उन्हें सुरक्षा बेल्ट और निर्देशों वाला फोन दिया गया, ताकि वह बचाव के लिए खुद को तैयार कर सकें। 4 अक्टूबर को उन्होंने हार्नेस को ड्रोन के हुक से जोड़ा और मशीन उन्हें करीब 15 किलोमीटर दूर सुरक्षित इलाके में ले गई। इस अभियान के दौरान दूसरे ड्रोन और हथियारों की मदद से सुरक्षा व्यवस्था भी की गई। बाद में व्लासेंको को खार्किव के सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनके कई ऑपरेशन हुए। उनकी कहानी युद्ध के बीच जीवित रहने की असाधारण कोशिश और आधुनिक तकनीक से किए गए जोखिम भरे बचाव अभियान को सामने लाती है।

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