उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों भूचाल आया हुआ है, और इसकी मुख्य वजह लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा है। कार्यालय के भीतर मचे हंगामे और बदसलूकी के बाद, यूपी कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सार्वजनिक रूप से सामने आकर जो बयान दिया, उसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पार्टी के भीतर की इस कलह और उठापटक के बीच आखिर अजय राय को क्यों हाथ जोड़कर माफी मांगनी पड़ी, और उन्होंने इसके पीछे की क्या पूरी कहानी बयां की है, आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में।
लखनऊ दफ्तर में हंगामे के बाद क्यों गिड़गिड़ाए अजय राय?
लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के अंदर हाल ही में कुछ ऐसा घटित हुआ जिसने पार्टी की आंतरिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कार्यालय के भीतर हुए भारी हंगामे और बवाल के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मीडिया के सामने आकर पूरे मामले पर सफाई दी और माफी भी मांगी। अजय राय ने बेहद नरमी दिखाते हुए कहा कि यदि उनके किसी समर्थक या करीबी ने कार्यालय परिसर के अंदर किसी के साथ भी बदसलूकी, अभ्रदता या गाली-गलौज की है, तो वह इसके लिए पूरी विनम्रता के साथ हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह कांग्रेस के एक निष्ठावान सिपाही और कार्यकर्ता हैं, जिन्हें पार्टी की ओर से जो भी नई जिम्मेदारी या निर्देश मिलेगा, वह उसका पूरी ईमानदारी से पालन करेंगे।
पार्टी छोड़ने की चर्चाओं पर विराम और राहुल गांधी की तारीफ
जैसे ही अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि वह जल्द ही कांग्रेस का हाथ छोड़कर किसी दूसरी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अजय राय ने इन तमाम अटकलों और चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं और कांग्रेस पार्टी में ही रहकर अपना राजनीतिक सफर जारी रखेंगे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की जमकर तारीफ की और उन्हें एक दमदार नेता बताया। अजय राय ने कहा कि राहुल गांधी उन्हें इसलिए बेहद पसंद हैं क्योंकि वह मैदान में संघर्ष करने और हर परिस्थिति से लड़ने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने दोहराया कि संगठन के हर एक निर्देश का वह सम्मान करते हैं और आगे भी करते रहेंगे।
वाराणसी से सांसद बनने का सपना और सियासी अटकलों का जवाब
अपने कार्यकाल और भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए अजय राय ने बताया कि वह तीन साल से अधिक समय तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहे। पद से हटाए जाने के सवाल पर उन्होंने बेबाकी से कहा कि राजनीति में कोई भी कुर्सी या पद हमेशा के लिए स्थायी नहीं होता, इसलिए उन्हें इस बात का बिल्कुल भी दुख नहीं है कि वह अब इस पद पर नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हमेशा लोगों के हक के लिए काम किया और उनके सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वाराणसी से सांसद बनना उनका एक बड़ा सपना है। इसके साथ ही उन्होंने उन चर्चाओं को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने के पीछे समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन का कोई हाथ है।
भाई की हत्या पर सरकार को घेरा, उठाए कड़े सवाल
राजनीतिक चर्चाओं के बीच अजय राय ने अपने ऊपर बीते समय में हुए व्यक्तिगत आघात का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने अपने भाई की हत्या के मामले को उठाते हुए प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया और तीखे सवाल पूछे। अजय राय ने कहा कि यदि मौजूदा सरकार उनके भाई की हत्या के मामले में आरोपियों को मिली सजा का श्रेय खुद लेना चाहती है, तो फिर कृष्णानंद राय हत्याकांड में गवाहों के पलटने और मुख्तार अंसारी के बरी होने की पूरी जिम्मेदारी पर भी खुलकर बात होनी चाहिए। अपने इस बयान के जरिए उन्होंने एक तरफ जहां न्याय व्यवस्था और सरकारी दावों पर सवालिया निशान लगाए, वहीं दूसरी तरफ यह संदेश भी दिया कि वह दबी जुबान में अपनी बात रखने वालों में से नहीं हैं। कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि अजय राय भले ही अब प्रदेश अध्यक्ष पद पर न हों, लेकिन यूपी की राजनीति में उनका रुख और तेवर अभी भी पूरी तरह से कायम हैं।
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