उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में हुए भीषण बस अग्निकांड ने पूरे महोबा जनपद को झकझोर कर रख दिया है। राज कल्पना ट्रैवल्स की स्लीपर बस में लगी आग ने एक हंसते-खेलते परिवार को पल भर में उजाड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिला कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता की पत्नी सुनीता गुप्ता और उनके इंजीनियर बेटे शशांक गुप्ता की जिंदा जलने से मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।
मां की जान बचाने की आखिरी कोशिश में उजड़ गया घर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महोबा जिले के चरखारी कस्बे के रहने वाले बीजेपी जिला कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता का परिवार किसी काम से बाहर गया हुआ था। वापसी के दौरान वे राज कल्पना ट्रैवल्स की स्लीपर बस में सवार थे। सफर के दौरान अचानक बस में आग लग गई, जिसने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि सुनीता गुप्ता पैरों के दर्द से जूझ रही थीं और चल-फिर नहीं पा रही थीं। अपनी मां को इस भयानक संकट में घिरा देख, इंडिगो एयरवेज में इंजीनियर पुत्र शशांक गुप्ता ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। अपनी जान की परवाह किए बिना मां को बचाने की जिद में बेटा भी आग की चपेट में आ गया और दोनों की दर्दनाक मौत हो गई।
शिनाख्त के लिए करना पड़ा लंबा इंतजार, डीएनए जांच से हुआ खुलासा
हादसा इतना वीभत्स था कि बस में सवार लोगों के शव बुरी तरह झुलस चुके थे, जिससे उनकी पहचान करना नामुमकिन हो गया था। अपनों की तलाश में भटक रहे परिजनों के लिए वह वक्त किसी सदमे से कम नहीं था। प्रशासनिक स्तर पर शवों की शिनाख्त के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लिया गया। इसके अलावा, परिजनों द्वारा बताए गए हुलिया और शरीर पर बचे निशानों के आधार पर मां-बेटे के शवों की पुष्टि की गई। जब डीएनए रिपोर्ट और पहचान की पुष्टि हुई, तो महोबा पहुंचे शवों को देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई।
राजनीतिक गलियारों और महोबा में शोक की लहर, सांत्वना देने पहुंच रहे लोग
इस हृदयविदारक घटना की खबर मिलते ही महोबा और आसपास के राजनीतिक गलियारों में सन्नाटा छा गया। बीजेपी कार्यकर्ताओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने नीरज गुप्ता के आवास पर पहुंचकर गहरी संवेदना व्यक्त की। एक साथ मां और बेटे की अर्थी उठने की इस घटना ने हर किसी का दिल दहला दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस दुखद हादसे पर अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। यह दुर्घटना एक बार फिर लंबी दूरी की स्लीपर बसों में सुरक्षा मानकों और लापरवाही के बड़े सवालों को खड़ा कर गई है, जिसने एक परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है।
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