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अस्पतालों में तीन दिनों तक भटकती रही निशा, आखिर ऐसा क्या हुआ? गर्भवती सहित दो जुड़वा बच्चों की मौत

अल्मोड़ा के सल्ट ब्लॉक में 24 वर्षीय गर्भवती निशा और उसके जुड़वा बच्चों की मौत हो गई। परिवार तीन दिनों तक अस्पतालों के चक्कर काटता रहा, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिला।

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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली दर्दनाक घटना अल्मोड़ा जिले से सामने आई है। सल्ट ब्लॉक के इनोलू गांव की 24 वर्षीय गर्भवती महिला निशा की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह गर्भ में जुड़वा बच्चों को लेकर चल रही थी। बताया गया कि निशा को अचानक सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई, जिसके बाद परिवार उसे इलाज के लिए लेकर निकला। समय पर सही उपचार नहीं मिलने के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

रामनगर से हल्द्वानी और काशीपुर तक भटकता रहा परिवार

परिजन निशा को लेकर रामनगर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे हल्द्वानी के हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिवार निशा को लेकर हल्द्वानी और काशीपुर के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में पहुंचा। आरोप है कि करीब तीन दिनों तक परिवार इलाज की तलाश में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा। इस दौरान निशा की हालत गंभीर होती गई, लेकिन उसे समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल सका। परिवार का कहना है कि लगातार रेफर किए जाने से इलाज में देरी हुई।

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ऑपरेशन के बाद दोनों बच्चों ने भी तोड़ा दम

काफी मशक्कत के बाद परिजन निशा को काशीपुर के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन के जरिए उसके गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों को बाहर निकाला। हालांकि, तब तक एक बच्चे की मौत हो चुकी थी। दूसरे बच्चे की हालत भी बेहद नाजुक थी और कुछ घंटों बाद उसने भी दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान निशा की भी मौत हो गई। इस तरह एक ही परिवार की तीन जिंदगियां खत्म हो गईं। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है और गांव में भी शोक का माहौल है।

परिजनों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगाए गंभीर आरोप

निशा के ससुर राजू टम्टा ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अगर उनकी बहू को समय पर उचित अस्पताल और इलाज मिल जाता, तो शायद तीनों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। इस घटना ने उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं, रेफरल व्यवस्था और अस्पतालों की तैयारियों पर बहस छेड़ दी है। मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक जांच या कार्रवाई की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

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