मामला तमिलनाडु के शिवगंगा की फैमिली कोर्ट से जुड़ा है। पति-पत्नी की शादी सितंबर 1992 में हुई थी और दोनों के चार बच्चे हैं। पति नौकरी के कारण शिवगंगा से मुंबई चला गया था, जबकि पत्नी उसके साथ नहीं गई। दोनों करीब 16 साल से अलग रह रहे थे। पति ने पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी, लेकिन फैमिली कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट का कहना था कि पति ने खुद पत्नी को अपने साथ नहीं रखा, इसलिए वह अपनी ही गलती का फायदा उठाकर तलाक नहीं मांग सकता।
हाईकोर्ट ने बदल दिया फैमिली कोर्ट का फैसला
मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा तो जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस एम.डी. सुमति की बेंच ने फैमिली कोर्ट की सोच से अलग राय रखी। अदालत ने कहा कि हर शादीशुदा जोड़े के लिए हर समय एक ही जगह रहना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने सैनिकों की नौकरी का उदाहरण देते हुए कहा कि कई पेशों में पति-पत्नी का साथ रहना हमेशा संभव नहीं होता। इसी तरह पत्नी की अपनी नौकरी, करियर और जिम्मेदारियां भी हो सकती हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने तलाक की अनुमति दे दी।
‘वोडाफोन पग’ का उदाहरण बना विवाद की वजह
फैसले के दौरान हाईकोर्ट ने वोडाफोन के पुराने और चर्चित विज्ञापन में दिखने वाले पग का उदाहरण दिया। उस विज्ञापन में कुत्ता अपने मालिक के पीछे-पीछे चलता नजर आता था। कोर्ट ने इसी संदर्भ में कहा कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पति जहां जाए, हर जगह उसके पीछे चलती रहे। हालांकि अदालत का उद्देश्य शादी में व्यावहारिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को समझाना था, लेकिन यही उदाहरण अब विवाद का कारण बन गया है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने उठाए सवाल
कोर्ट के फैसले से ज्यादा उसकी भाषा पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई लोगों का कहना है कि पत्नी को पालतू जानवर से जोड़ना उचित उदाहरण नहीं था। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता चारु माथुर ने भी इस टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पत्नी विवाह में बराबर की भागीदार होती है, किसी की पालतू नहीं। अब इस मामले में चर्चा कानूनी फैसले से आगे बढ़कर अदालतों की भाषा और महिलाओं के सम्मान तक पहुंच गई है।
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