जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर हुए विवाद के बाद मामला अब और गरमा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घटना को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल की स्थिति देखने पहुंचे आशुतोष रांका और उनकी टीम के साथ कुछ लोगों ने मारपीट और धक्कामुक्की की। इस दौरान उनकी कार के शीशे तोड़े जाने का भी दावा किया गया। घटना के बाद दीपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पूरे मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
‘48 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो जयपुर आऊंगा’
अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे के भीतर स्कूल को ठीक कराने का काम शुरू नहीं हुआ और कथित हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वह खुद जयपुर पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि जयपुर आने के बाद वह संबंधित स्कूल के बाहर बैठेंगे और तब तक वहां से नहीं हटेंगे, जब तक स्कूल को सुधारने का काम शुरू नहीं हो जाता। उनकी इस घोषणा के बाद स्कूल विवाद को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा और तेज हो गई है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन की ओर से मामले में कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
स्कूल के निरीक्षण को लेकर हुआ था विवाद
यह पूरा मामला शुक्रवार, 21 अगस्त को जयपुर जिले के रामपुरा कंवरपुरा गांव में सामने आया। जानकारी के मुताबिक, आशुतोष रांका और CJP की टीम स्कूल की स्थिति का जायजा लेने वहां पहुंची थी। इसी दौरान स्थानीय लोगों के साथ विवाद होने का आरोप है। CJP की ओर से दावा किया गया कि कार्यकर्ताओं को वहां से जाने के लिए कहा गया और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। कार के शीशे तोड़े जाने की बात भी सामने आई है। दूसरी तरफ, घटना से जुड़े आरोपों की पूरी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में मामले को लेकर सामने आ रहे अलग-अलग दावों पर प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
स्कूल की हालत को लेकर उठ रहे हैं सवाल
अभिजीत दीपके ने अपने वीडियो में स्कूल की कथित खराब स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बच्चों को बेहद खराब परिस्थितियों में पढ़ाया जा रहा था और इसी स्थिति को सामने लाने के लिए आशुतोष रांका वहां पहुंचे थे। दीपके ने कहा कि उनका उद्देश्य स्कूल की स्थिति में सुधार कराना है। अब उनकी 48 घंटे वाली चेतावनी के बाद यह देखना अहम होगा कि प्रशासन स्कूल की स्थिति और घटना में लगाए गए आरोपों पर क्या कदम उठाता है। फिलहाल इस विवाद ने जयपुर के सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और वहां निरीक्षण को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
