झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के लिए एक बार फिर बड़ी कानूनी मुश्किलें खड़ी होती नजर आ रही हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) और जेपीएससी (JPSC) से जुड़ी कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों को अचानक रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था। सरकार के इस आदेश के खिलाफ प्रभावित छात्रों और अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गुरुवार को इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ताओं को राहत दी और सरकार के उस आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी, जिसके तहत ये परीक्षाएं रद्द की गई थीं। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से राज्य सरकार और आयोग के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं।
क्या है पूरा विवाद और छात्रों का आंदोलन
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब राज्य में लगातार हो रहे छात्र आंदोलनों और पेपर लीक जैसे गंभीर विवादों के बाद सियासी सरगर्मी बढ़ गई थी। युवाओं के भारी विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव के चलते हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इन 22 परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया था। सरकार का यह दावा था कि इससे व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और नई भर्तियों के जरिए युवाओं को निष्पक्ष अवसर देने का रास्ता साफ होगा। हालांकि, सरकार के इस फैसले से उन मेहनती और योग्य उम्मीदवारों पर गाज गिर गई थी जो लंबे समय से इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे और कई चरणों की प्रक्रिया सफलतापूक पार कर चुके थे।
अदालती कार्यवाही और याचिकाकर्ताओं को राहत
झारखंड हाईकोर्ट में हुई इस सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को बहुत बारीकी से सुना। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट के सामने यह बात मजबूती से रखी कि बिना ठोस और कानूनी आधार के अचानक दर्जनों परीक्षाओं को रद्द करना हजारों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जो उनके मौलिक अधिकारों का भी हनन है। अदालत ने इन दलीलों में दम पाते हुए सरकार के उस फैसले पर स्टे लगा दिया। इस फैसले के बाद अब उन सभी उम्मीदवारों में एक बार फिर उम्मीद की किरण जाग उठी है जो इस बात से डरे हुए थे कि उनकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
आगे क्या होगा और राजनीतिक हलचल तेज
झारखंड हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। आगामी दिनों में इस मामले पर सरकार की तरफ से क्या रुख अपनाया जाता है और अदालत का अगला कदम क्या होगा, इस पर पूरे राज्य के बेरोजगार युवाओं की निगाहें टिकी हुई हैं। इस कानूनी पेंच के कारण अब जेएसएससी और जेपीएससी की आगे की प्रक्रियाएं और भी पेचीदा हो सकती हैं। एक तरफ जहां छात्र इसे अपने संघर्ष की आंशिक जीत मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर सरकार के लिए इसे संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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