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लखनऊ में नगर निगम करने जा रही बड़ी कार्रवाई, हाई कोर्ट के आदेश के बाद इस चीज पर होगा एक्शन

हाईकोर्ट के आदेश के बाद लखनऊ नगर निगम ने सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की है। जानिए 90 दिन में क्या होगी कार्रवाई और कोर्ट ने क्या कहा।

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Lucknow News: लखनऊ में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और प्लॉटिंग से जुड़े मामले में लखनऊ नगर निगम ने हाईकोर्ट को कार्रवाई का भरोसा दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के निर्देश के बाद नगर निगम ने बताया कि संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब अतिक्रमण से जुड़े मामलों का निस्तारण 90 दिनों के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद अवैध कब्जे और निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हुई थी कार्रवाई

मामला खरगापुर की कुछ जमीनों से जुड़ा है, जहां सरकारी जमीन पर कथित तौर पर कब्जा कर प्लॉटिंग और बिक्री किए जाने का आरोप लगाया गया था। याचिका में बताया गया कि गाटा संख्या 248, 227 सा, 228, 246 और 247 की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में तालाब, ऊसर और बंजर के रूप में दर्ज है। आरोप है कि इन जमीनों पर कब्जा करने के बाद प्लॉट काटकर उन्हें बेचा गया। इसी मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 19 मार्च 2026 को सुनवाई करते हुए लखनऊ नगर निगम को सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए थे और इसके लिए तीन महीने की समयसीमा तय की थी।

समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो दाखिल हुई अवमानना याचिका

कोर्ट की ओर से तय समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने पर याचिकाकर्ता विनय मिश्रा ने नगर आयुक्त गौरव कुमार समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई के दौरान लखनऊ नगर निगम ने कोर्ट के सामने अपना अनुपालन शपथपत्र पेश किया। इसमें निगम ने अब तक की गई कानूनी प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई की जानकारी दी। नगर निगम ने बताया कि अतिक्रमण से जुड़े मामलों में राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के तहत कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अवैध कब्जे और निर्माण हटाए जाएंगे।

90 दिन में पूरा होगा मामला, कोर्ट ने दी अहम छूट

लखनऊ नगर निगम ने अपने शपथपत्र में कहा कि संबंधित मामलों को वैधानिक प्रक्रिया के तहत 90 दिनों में निपटाने का प्रयास किया जाएगा। अंतिम आदेश पारित होने के बाद सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी। यानी फिलहाल सिर्फ शिकायत के आधार पर सीधे कब्जे हटाने के बजाय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कोर्ट ने लखनऊ नगर निगम का अनुपालन शपथपत्र रिकॉर्ड में लेते हुए अवमानना याचिका का निस्तारण कर दिया।

पांच महीने बाद फिर कोर्ट पहुंचने का रास्ता खुला

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए यह छूट भी दी है कि अगर मूल आदेश का पांच महीने के भीतर जमीन पर वास्तविक रूप से पालन नहीं होता है, तो वह अवमानना याचिका को दोबारा सुनवाई के लिए बहाल कराने की मांग कर सकता है। ऐसे में अब लखनऊ नगर निगम के सामने तय समय में प्रक्रिया पूरी कर सरकारी जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने की चुनौती है। इस मामले पर कोर्ट की नजर भी बनी रहेगी और आदेश का जमीनी स्तर पर पालन नहीं होने पर मामला फिर सामने आ सकता है।

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