उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए BJP ने आठ उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। खास बात यह है कि पार्टी ने अपने मौजूदा आठों राज्यसभा सदस्यों को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। इनमें केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा के नाम भी शामिल हैं। दोनों का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है। बीजेपी की नई सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को जगह मिली है।
हरदीप पुरी का राजनीतिक सफर और अब सबसे बड़ा सवाल
हरदीप सिंह पुरी पहली बार 2018 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद 2020 में उन्हें दोबारा इसी राज्य से उच्च सदन भेजा गया। वह मोदी सरकार में पहले राज्यमंत्री रहे और बाद में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। अब तीसरी बार राज्यसभा भेजे जाने वाली सूची में उनका नाम नहीं है। बीएल वर्मा का कार्यकाल भी नवंबर में समाप्त हो रहा है और उन्हें भी बीजेपी ने दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाया। इसी वजह से दोनों नेताओं की आगे की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या राज्यसभा टिकट नहीं मिलने का मतलब मंत्री पद भी जाएगा?
दोनों मंत्रियों का नाम राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची से बाहर होने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव की अटकलें जरूर तेज हुई हैं, लेकिन अभी यह कहना सही नहीं होगा कि दोनों का मंत्री पद जाना तय है। संविधान के अनुच्छेद 75(5) के मुताबिक कोई व्यक्ति बिना संसद के किसी सदन का सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक मंत्री रह सकता है। ऐसे में अगर दोनों को किसी अन्य सीट या तरीके से संसद सदस्यता नहीं मिलती है तो आगे उनके मंत्री पद पर सवाल खड़ा हो सकता है। फिलहाल बीजेपी या केंद्र सरकार की ओर से दोनों नेताओं को लेकर कोई आधिकारिक फैसला या घोषणा नहीं हुई है।
पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को लेकर भी चर्चा
केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव की चर्चा सिर्फ हरदीप पुरी और बीएल वर्मा तक सीमित नहीं है। पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की कमान दी गई है। ऐसे में बीजेपी के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ सिद्धांत के कारण उनकी मंत्री पद की जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन दोनों को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाए जाने की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल कैबिनेट विस्तार या फेरबदल को लेकर सामने आ रही खबरों को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
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