मेरठ जिला जेल में कैदियों के तनाव को कम करने और उन्हें सकारात्मक माहौल देने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है। जेल परिसर में ‘रेडियो परवाज़’ नाम से रेडियो रूम बनाया गया है, जहां बंदियों की पसंद के गाने और प्रेरणादायक कार्यक्रम सुनाए जाते हैं। यह पहल रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी किरण बेदी की संस्था इंडिया विजन फाउंडेशन के सहयोग से शुरू की गई है। जेल प्रशासन के मुताबिक इसका मकसद कैदियों को खाली समय में सकारात्मक गतिविधि से जोड़ना है। बंदी अपनी पसंद के गाने सुनने के लिए एक दिन पहले पर्ची के जरिए फरमाइश भेज सकते हैं। इसके अलावा अगर कोई कैदी रेडियो जॉकी बनना चाहता है तो उसे भी मौका दिया जाता है।
पुराने गानों और दर्द भरे गीतों की सबसे ज्यादा मांग
मेरठ जेल के वरिष्ठ अधीक्षक विनेश राज शर्मा के मुताबिक रेडियो परवाज़ का नियमित संचालन किया जा रहा है और इसका कैदियों पर अच्छा असर दिखाई दे रहा है। जेल में बंद ज्यादातर कैदी युवा हैं, इसलिए यहां 90 के दशक के गानों के साथ पुराने फिल्मी गीतों की भी खूब फरमाइश आती है। कई बंदी प्यार और मोहब्बत से जुड़े गाने सुनना पसंद करते हैं, जबकि कुछ लोग दर्द और जुदाई वाले गीतों की मांग करते हैं। जेल प्रशासन का मानना है कि संगीत के जरिए बंदियों को मानसिक रूप से व्यस्त रखा जा सकता है। इससे उन्हें अकेलेपन और तनाव से बाहर निकलने में मदद मिलती है। रेडियो के जरिए उन्हें मनोरंजन के साथ सकारात्मक संदेश भी दिए जाते हैं।
मुस्कान की पुराने गानों की पसंद, साहिल ने मांगे प्रेम गीत
मेरठ जेल में चर्चित मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल भी बंद हैं। जेल प्रशासन के अनुसार दोनों की ओर से भी रेडियो पर गाने सुनने के लिए फरमाइश भेजी जाती है। मुस्कान ने पुराने गाने सुनने की इच्छा जताई है, जबकि साहिल की पसंद प्रेम गीत बताए गए हैं। जेल प्रशासन के लिए यह रेडियो सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि बंदियों को एक रचनात्मक गतिविधि से जोड़ने का माध्यम भी है। कैदी अपनी पसंद के गाने की फरमाइश देकर रेडियो कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं। इस पहल के जरिए जेल में रहने वाले लोगों को अपनी भावनाओं को सकारात्मक तरीके से व्यक्त करने का अवसर भी मिल रहा है।
लड़ाई-झगड़े कम करने में भी मदद का दावा
जेल प्रशासन का कहना है कि रेडियो परवाज़ शुरू होने के बाद बंदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। अधिकारियों के मुताबिक गाने और दूसरे कार्यक्रम सुनने से कैदियों का ध्यान सकारात्मक गतिविधियों में लग रहा है, जिससे तनाव और आपसी विवाद कम करने में मदद मिली है। जेल के अलग-अलग हिस्सों में स्पीकर लगाए गए हैं और पूरे सिस्टम को एक कंट्रोल रूम से संचालित किया जाता है। रेडियो पर रोमांटिक और पुराने गानों के अलावा प्रेरणादायक कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं। प्रशासन का मानना है कि जेल में सजा के साथ सुधार पर भी ध्यान देना जरूरी है। इसी सोच के तहत संगीत को माध्यम बनाकर कैदियों के मानसिक तनाव को कम करने और उन्हें बेहतर माहौल देने की कोशिश की जा रही है।
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