यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी और अहम अपडेट सामने आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) इस बार तीन प्रमुख विषयों—इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी—की परीक्षा को दोबारा आयोजित करने पर विचार कर रही है। परीक्षा के दौरान कई तरह की तकनीकी और पेपर से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतें मिलने के बाद एनटीए ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, जिससे छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
क्यों उठ रही है दोबारा परीक्षा की मांग?
एनटीए सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में संपन्न हुई यूजीसी नेट परीक्षा के दौरान विभिन्न केंद्रों से प्रश्नपत्रों को लेकर कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। खासतौर पर इंग्लिश विषय के पेपर में साल 2024 के पुराने प्रश्नों को बड़े पैमाने पर दोहराए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, सोशियोलॉजी (समाजशास्त्र) के प्रश्नपत्र में स्पेलिंग की अशुद्धियाँ, भाषा से जुड़ी भ्रामक त्रुटियाँ और प्रिंटिंग से जुड़ी कई बड़ी गलतियां पाई गई थीं, जिसके कारण परीक्षार्थियों को प्रश्नों को समझने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
शिकायतों के बाद एनटीए द्वारा गठित समिति
इन तमाम गंभीर शिकायतों और छात्रों के विरोध को देखते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। यह समिति इस बात की गहनता से जाँच कर रही है कि पेपर लीक या त्रुटियों का स्तर कितना व्यापक था। समिति की रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर ही एनटीए इन तीनों विषयों की परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से आयोजित करने का अंतिम फैसला ले सकता है, ताकि किसी भी छात्र के भविष्य के साथ अन्याय न हो।
छात्रों के लिए आगे की राह और निर्देश
परीक्षा रद्द होने और दोबारा एग्जाम की सुगबुगाहट के बीच, छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय केवल एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट (ugcnet.nta.ac.in) पर नजर बनाए रखें। यदि समिति दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लेती है, तो एजेंसी जल्द ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इस संबंध में एक स्पष्ट और विस्तृत अधिसूचना जारी करेगी, जिसमें री-एग्जाम की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और आगे की उम्मीदें?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेपर में बड़े पैमाने पर प्रिंटिंग मिस्टेक और पुराने सवाल दोहराए जाने की बात सही पाई जाती है, तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए री-एग्जाम कराना ही एकमात्र विकल्प बचता है। हालांकि, आधिकारिक मुहर लगने तक उम्मीदवारों को अपनी पढ़ाई जारी रखनी चाहिए ताकि किसी भी अचानक बदलाव की स्थिति में वे पूरी तरह से तैयार रहें। एनटीए का यह कदम परीक्षा प्रणाली की शुचिता को बनाए रखने के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।
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