मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट इलाके से एक बेहद सनसनीखेज और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा अपने भाई की छोटी सी डांट से नाराज होकर घर से निकल गई थी. गुस्से में उठाया गया यह कदम उसकी जिंदगी को एक ऐसे अंधकारमय रास्ते पर ले गया, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होगी. घर छोड़ने के बाद जब वह मुजफ्फरपुर जंक्शन पर अकेली रो रही थी, तभी वहां एक शातिर मानव तस्कर सक्रिय हो गया. आरोपी ने मीठी-मीठी बातों और कोलकाता में अच्छी नौकरी का झांसा देकर उसे अपने जाल में फंसा लिया. परिवार को लगा कि कुछ देर में गुस्सा शांत होने के बाद बेटी लौट आएगी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनकी यह बेटी अब अगले 85 दिनों तक अपनों से कोसों दूर तस्करों के चंगुल में फंसने वाली है.
कोलकाता से भागलपुर तक: तस्करों ने ऐसे बदला ठिकाना
नौकरी का सपना दिखाकर तस्कर छात्रा को सीधे कोलकाता ले गए, जहां हकीकत सामने आने पर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. कोलकाता के रेड लाइट एरिया में उसे बेचने का खुलासा हुआ है. जब मासूम छात्रा ने इस अमानवीय कृत्य का विरोध किया, तो तस्करों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की और उसे जबरन बंधक बनाकर रखा. जुल्म और दहशत के इस माहौल में करीब एक महीना बीतने के बाद तस्करों ने उसका ठिकाना फिर बदल दिया. उसे कोलकाता से लाकर भागलपुर के इशीपुर बरहट थाना क्षेत्र के सिवानपुर स्थित रेड लाइट एरिया में दोबारा बेच दिया गया. इस दौरान मुजफ्फरपुर पुलिस और गायब छात्रा का परिवार उसकी तलाश में लगातार दर-दर भटक रहा था, लेकिन सुराग हाथ नहीं लग पा रहा था.
52 मिनट का संघर्ष और सर्विस पिस्टल की नोंक पर रेस्क्यू
गायघाट थाने में अपहरण का मामला दर्ज होने के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक स्पेशल टीम का गठन किया था. पुलिस ने मुखबिर तंत्र को एक्टिव किया और तकनीकी इनपुट के आधार पर दो दिन पहले भागलपुर के सिवानपुर इलाके में स्थित उस संदिग्ध मकान की पहचान कर ली जहां लड़की को रखा गया था. जब मुजफ्फरपुर पुलिस की स्पेशल टीम ने वहां छापेमारी की, तो स्थानीय लोगों ने भारी विरोध और धक्का-मुक्की शुरू कर दी. हालात इतने बिगड़ गए कि महिला जांच अधिकारी पूजा कुमारी को अपनी जान और रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए सर्विस पिस्टल निकालनी पड़ी. करीब 52 मिनट तक चले इस कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार पुलिस ने छात्रा को सकुशल मुक्त करा लिया.
दूसरी पीड़िता की बरामदगी
इस साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस को उसी मकान से नालंदा जिले की एक और किशोरी भी मिल गई, जिसे तस्करों ने बंधक बना रखा था. उसने भी पुलिस को देखते ही मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद पुलिस ने उसे भी सुरक्षित मुक्त कराकर नालंदा पुलिस को सूचना दी. दोनों किशोरियों को अब मुजफ्फरपुर सुरक्षित वापस लाया गया है. डीएसपी पूर्वी-1 अलय वत्स के अनुसार, पुलिस अब सिर्फ बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे मानव तस्करी रैकेट की तह तक जाने में जुटी है. पुलिस यह खंगाल रही है कि मुजफ्फरपुर जंक्शन से उस छात्रा को कोलकाता तक कौन ले गया, वहां उसे किस गिरोह को सौंपा गया और भागलपुर तक पहुंचाने में स्थानीय स्तर पर कौन-कौन लोग शामिल थे.
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