पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज की मौत की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि कारी सईद इस्लामाबाद स्थित लश्कर-ए-तैयबा की मस्जिद कूबा में नमाज पढ़ने पहुंचा था। सामने आए CCTV फुटेज के मुताबिक, वह अपने साथ एक बैग लेकर मस्जिद में दाखिल हुआ और वहां मौजूद एक साथी को बैग पकड़ा दिया। इसके बाद उसने वुजू किया और नमाज के लिए आगे बढ़ा। जैसे ही वह मुख्य हॉल में जाने से पहले चप्पल उतारने के लिए बैठा, अचानक जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद संगठन के लोगों ने उसे उठाया और मदद करने की कोशिश की।
CPR देने के बाद भी नहीं बची जान, अस्पताल में मौत
कारी सईद के जमीन पर गिरने के बाद वहां मौजूद लोगों ने उसे संभालने की कोशिश की। सांस चलती न दिखने पर उसे CPR भी दिया गया। काफी कोशिश के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकी मौत की वजह को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। घटना को संदिग्ध इसलिए माना जा रहा है क्योंकि वह अचानक मस्जिद के अंदर गिर पड़ा था। सामने आए वीडियो में उसके साथ किसी तरह की झड़प या हमला दिखाई नहीं देता। ऐसे में उसकी मौत के पीछे क्या कारण था, इसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार जरूरी है।
1990 से हाफिज सईद के साथ था करीबी संबंध
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कारी सईद लंबे समय से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। बताया जाता है कि वह 1990 से आतंकी हाफिज सईद के संपर्क में था और संगठन में उसके करीबी लोगों में शामिल माना जाता था। कारी सईद करीब 2017 तक संगठन की आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रहा। उसका एक प्रमुख काम कथित तौर पर संगठन के लिए नए लोगों की भर्ती करना था। बाद में लश्कर-ए-तैयबा ने उसे संगठन के प्रशासन से जुड़े कामों में लगा दिया। इस दौरान वह दक्षिण पंजाब के कई इलाकों में संगठन के नेटवर्क से जुड़े काम देखता था। इनमें मुल्तान, बहावलपुर और डेरा गाजी खान जैसे इलाके बताए जाते हैं।
आतंकियों के परिवारों को पैसे पहुंचाने का भी आरोप
कारी सईद पर लश्कर-ए-तैयबा के लिए आतंकियों के परिवारों से जुड़े काम संभालने का भी आरोप रहा है। बताया जाता है कि वह संगठन के एक विभाग के जरिए भारत में मारे गए आतंकियों के परिवारों तक हर महीने आर्थिक मदद पहुंचाने का काम करता था। इसके अलावा दक्षिण पंजाब के अलग-अलग जिलों से जुड़े आतंकियों का रिकॉर्ड तैयार करने की जिम्मेदारी भी उसके पास होने की बात सामने आई है। इस तरह वह संगठन की जमीनी और प्रशासनिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। अब इस आतंकी कमांडर की अचानक हुई मौत के बाद पाकिस्तान में लश्कर के नेटवर्क को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल उसकी मौत की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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