झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में चल रहा छात्रों का आंदोलन लगातार लंबा होता जा रहा है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से छात्र धरना और भूख हड़ताल कर रहे हैं। इसी बीच अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों में शामिल राहुल की तबीयत अचानक खराब हो गई। हालत बिगड़ने के बाद मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला किया। राहुल की तबीयत खराब होने की खबर फैलते ही प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों में चिंता बढ़ गई।
भूख हड़ताल के बीच बिगड़ी राहुल की हालत
बताया जा रहा है कि राहुल उन चार प्रदर्शनकारियों में शामिल हैं, जो लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लंबे समय से खाना नहीं खाने के कारण उनकी सेहत पर असर पड़ने की बात सामने आई है। स्थिति बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने उनकी जांच की और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल किसी एक परीक्षा को लेकर नहीं है। वे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित पेपर लीक व गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अगर भर्ती प्रक्रिया भरोसेमंद होगी, तभी मेहनत करने वाले युवाओं को उनका हक मिल सकेगा।
छात्रों ने कहा- हमारी आवाज सुनी जाए
आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि लगातार प्रदर्शन के बावजूद उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। छात्रों के मुताबिक उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी अपनी मांगों को लेकर बातचीत की है और उनका समर्थन मिलने का दावा किया है। अब प्रदर्शनकारी उनसे मुलाकात के लिए समय मिलने का इंतजार कर रहे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी खराब होती सेहत का जिक्र करते हुए सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि वे ऐसा सिस्टम चाहते हैं, जिसमें भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक की कोई गुंजाइश न रहे।
सविता की कहानी ने भी खींचा ध्यान
इस आंदोलन में शामिल 27 वर्षीय सविता ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उनके पिता ने काफी संघर्ष करके उन्हें पढ़ाया है। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस स्थिति में घर कैसे लौटें। उनका कहना है कि युवाओं की उम्र निकल रही है और वे लगातार मेहनत कर रहे हैं, लेकिन व्यवस्था की खामियों का असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक उनकी लड़ाई सिर्फ नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भर्ती प्रक्रिया में सुधार चाहते हैं। इसी वजह से आंदोलन में शामिल कई छात्र अपनी पढ़ाई और निजी परेशानियों के बावजूद धरने पर डटे हुए हैं।
स्थानीय लोगों से मिल रहा समर्थन, बाहर से भी पहुंच रही मदद
रांची के इस आंदोलन को स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। कुछ लोग प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए नकद और ऑनलाइन सहायता पहुंचा रहे हैं, लेकिन छात्रों का कहना है कि वे आर्थिक मदद स्वीकार नहीं करना चाहते। आसपास के दुकानदार भी जरूरत के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की मदद कर रहे हैं। खराब मौसम के बीच प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए सीजेपी की ओर से रेनकोट भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। संगठन का नेतृत्व भी रांची पहुंचने वाला है। अब राहुल की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर सबकी नजर बनी हुई है।
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