लोकसभा ने बुधवार को पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के पास होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसे देश के करोड़ों छात्रों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाना नहीं, बल्कि पूरे उस नेटवर्क को खत्म करना है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता को प्रभावित करता है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगा और मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं के बाद युवाओं के बीच जो चिंता बढ़ी थी, सरकार का दावा है कि यह कानून उस भरोसे को फिर से मजबूत करेगा।
शिक्षा मंत्री ने बताए नए कानून के बड़े प्रावधान
लोकसभा में विधेयक पारित होने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि नए कानून में कई सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। उनके अनुसार, परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था भी की जाएगी। जांच एजेंसियों को अधिक अधिकार दिए जाएंगे ताकि पेपर लीक से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस कानून का मकसद केवल किसी एक आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र को खत्म करना है जो युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस कदम से प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पहले से अधिक मजबूत होगी।
सदन में बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। उनके कुछ बयानों को लेकर सदन में हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस घटना का जिक्र किया जा रहा है, उसमें गोली नहीं चली थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में गोली चलाने का निर्णय गृह मंत्री नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद मजिस्ट्रेट लेते हैं। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई और बाद में विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
छात्रों की उम्मीदें बढ़ीं, अब अगले चरण पर नजर
लोकसभा से विधेयक पारित होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाएं अधिक सुरक्षित और निष्पक्ष होंगी। सरकार का कहना है कि इस कानून से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी और दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई संभव होगी। संसद में विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई। अब इस कानून के आगे की संसदीय प्रक्रिया और इसके लागू होने पर सभी की नजरें टिकी हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस कानून का प्रभावी तरीके से पालन किया गया, तो इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और मेहनत करने वाले छात्रों का विश्वास भी मजबूत होगा।
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