करीब 11 साल से चल रहे कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी कानूनी राहत दी है। अदालत ने विशेष सीबीआई अदालत द्वारा जारी किए गए समन को रद्द कर दिया और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। इस फैसले के साथ ही इस मामले में डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई। यह फैसला उनके निधन के लगभग दो वर्ष बाद आया है। लंबे समय से लंबित इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे एक दशक से अधिक समय से चल रहे विवाद का कानूनी अंत हो गया है।
2015 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे मनमोहन सिंह
कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में विशेष अदालत ने वर्ष 2014 में डॉ. मनमोहन सिंह को आरोपी के रूप में तलब किया था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2015 में इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। पहली सुनवाई के दौरान ही शीर्ष अदालत ने समन पर रोक लगा दी थी, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिल गई थी। इसके बाद मामला कई वर्षों तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहा। इस दौरान समन की वैधता और जांच से जुड़े कई कानूनी पहलुओं पर सुनवाई होती रही। हालांकि अंतिम फैसला आने से पहले ही दिसंबर 2024 में डॉ. मनमोहन सिंह का निधन हो गया। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले ने इस पूरे मामले पर अंतिम मुहर लगा दी है।
CBI की क्लोजर रिपोर्ट को अदालत ने माना सही
इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अपनी जांच पूरी करने के बाद अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। जांच एजेंसी का मानना था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे आपराधिक कार्रवाई का पर्याप्त आधार नहीं बनता। सुप्रीम कोर्ट ने इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा कि इसे खारिज करने या डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ संज्ञान लेने का कोई ठोस कारण नहीं पाया गया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और जांच रिपोर्ट का सावधानी से परीक्षण किया गया है। अदालत ने माना कि सीबीआई द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया जाना उचित है और विशेष अदालत का आदेश कानून के अनुरूप नहीं था।
लंबे समय से चर्चा में रहा था कोल ब्लॉक आवंटन मामला
कोयला ब्लॉक आवंटन मामला देश के चर्चित मामलों में शामिल रहा है। यह विवाद उन फैसलों से जुड़ा था, जो डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहने के दौरान लिए गए थे। इसी आधार पर विभिन्न मामलों में जांच शुरू हुई थी और कई स्तरों पर कानूनी कार्रवाई भी चली। हालांकि हर मामले के तथ्य और परिस्थितियां अलग-अलग थीं। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ा यह कानूनी विवाद समाप्त हो गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दिया गया है। इस फैसले के बाद एक दशक से अधिक समय से लंबित यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के स्तर पर अपने निष्कर्ष तक पहुंच गया है।
