जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले प्रदर्शन के खत्म होने के बाद अब एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि सरकार के साथ हुई बातचीत और अदालत के आदेश में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। पार्टी का कहना है कि प्रदर्शन समाप्त करने से पहले सरकार ने भरोसा दिलाया था कि आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR वापस ली जाएंगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में पहले से दर्ज मामलों की जांच जारी रखने की अनुमति मिलने से CJP ने इसे अपने साथ हुए आश्वासन के खिलाफ बताया है। इसी मुद्दे पर पार्टी ने सरकार से जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
CJP बोली- हमें सुप्रीम कोर्ट की ये शर्तें मंजूर नहीं
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन सरकार से किए गए वादों को पूरा करने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन अदालत के आदेश के बाद हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान कभी यह नहीं कहा गया था कि FIR बनी रहेंगी और केवल जांच आगे बढ़ेगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संगठन सुप्रीम कोर्ट की उन शर्तों से सहमत नहीं है, जिनके तहत पहले से दर्ज मामलों की जांच जारी रखने की बात कही गई है। दास ने यह भी कहा कि सरकार को आंदोलन खत्म कराने के समय जो भरोसा दिया गया था, उसका सम्मान करना चाहिए और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस लेने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
‘असली प्रदर्शनकारियों को निशाना नहीं बनाया जाए’
सौरव दास ने सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि कुछ लोगों ने कानून तोड़ा है तो उनके खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन इस आधार पर पूरे आंदोलन में शामिल लोगों को संदेह के घेरे में रखना उचित नहीं है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति पर पहले से गंभीर मामले दर्ज हैं तो पुलिस को उन्हीं मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर लोगों को लगातार जांच के दायरे में रखना सही संदेश नहीं देता। CJP का मानना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को अपराधियों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
सरकार पर वादा निभाने का दबाव, आगे क्या होगा?
CJP ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने बातचीत के दौरान किए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किया तो संगठन आगे की रणनीति पर विचार कर सकता है। पार्टी का कहना है कि युवाओं और प्रदर्शनकारियों के विश्वास को बनाए रखने के लिए सरकार को स्पष्ट फैसला लेना होगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश लागू है और कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह जारी रहेगी, लेकिन दूसरी ओर CJP लगातार यह मांग दोहरा रही है कि सरकार सार्वजनिक रूप से किए गए वादों का पालन करे। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और अदालत की अगली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है। राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर यह मुद्दा अब फिर से चर्चा का केंद्र बन गया है।
