Dharmendra Pradhan Parliament News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। संसद भवन के मकर द्वार पर उनके पहुंचते ही एनडीए और भाजपा सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान कई सांसदों ने उनके समर्थन में “धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद” के नारे लगाए। इस्तीफे के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था, इसलिए संसद परिसर का यह दृश्य पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा। एक तरफ भाजपा सांसद अपने पूर्व मंत्री के समर्थन में खड़े दिखाई दिए, तो दूसरी ओर विपक्ष सरकार को लगातार घेरने की रणनीति पर कायम रहा। संसद के बाहर और भीतर दोनों जगह राजनीतिक माहौल काफी गर्म नजर आया।
संसद के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन भी रहा जारी
मकर द्वार के पास ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विपक्षी दलों के कई सांसद विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्ष का कहना था कि छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री से जवाब मांगा और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। मीडिया से बातचीत में प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन से जुड़े कुछ छात्रों के खिलाफ अब भी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन सूचनाओं की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। विपक्ष ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह उठाने का फैसला किया।
हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही प्रभावित
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही सुबह शुरू होते ही विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण सामान्य रूप से नहीं चल सकी। लगातार नारेबाजी और विरोध के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसी बीच चर्चा रही कि पेपर लीक कानून में संशोधन से जुड़ा विधेयक भी लोकसभा में पेश किया जा सकता है। राजनीतिक दलों की नजर इस विधेयक और उससे जुड़ी बहस पर बनी हुई है। छात्रों के आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे संसद के मौजूदा सत्र के सबसे प्रमुख विषयों में शामिल हो गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
इस्तीफे के बाद भी जारी है राजनीतिक बयानबाजी
धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले सप्ताह अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा था कि वह नहीं चाहते कि मौजूदा स्थिति का फायदा देश विरोधी ताकतें उठाएं या छात्रों का भविष्य प्रभावित हो। उन्होंने अपने संदेश में छात्रों से पढ़ाई और करियर पर ध्यान देने की अपील भी की थी। उनके इस्तीफे के बाद कई विपक्षी नेताओं ने इसे छात्रों के आंदोलन की सफलता बताया, जबकि भाजपा नेताओं ने उनके फैसले की सराहना की। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने भी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन समाप्त होने का स्वागत किया। अब धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने और भाजपा सांसदों द्वारा किए गए स्वागत ने इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को एक नया आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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