दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। हजारों छात्र निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया (Danish Kaneria) की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। कनेरिया ने भारत में चल रहे छात्र आंदोलन पर ऐसी टिप्पणी की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया, लेकिन बड़ी संख्या में यूजर्स ने उनकी आलोचना करते हुए सवाल उठाए कि भारत के आंतरिक मुद्दों पर उन्हें टिप्पणी करने की जरूरत क्यों पड़ी। देखते ही देखते उनकी पोस्ट वायरल हो गई और कई घंटों तक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी रही।
पोस्ट में क्या लिखा, जिस पर शुरू हुई बहस?
दानिश कनेरिया (Danish Kaneria) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में होने वाले अधिकांश विरोध प्रदर्शनों में समाधान से ज्यादा नारेबाजी और राजनीतिक टकराव देखने को मिलता है। उन्होंने यह भी लिखा कि ऐसे आंदोलन देश की प्रगति के लिए सही संकेत नहीं हैं और विपक्ष पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई। कई यूजर्स ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार होता है, इसलिए इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है। वहीं कुछ लोगों ने कनेरिया के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि आंदोलनों का उद्देश्य समाधान होना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक विवाद। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि एक विदेशी पूर्व क्रिकेटर के बयान ने भारतीय सोशल मीडिया पर इतनी बड़ी बहस कैसे छेड़ दी।
पुराने विवाद भी फिर आए चर्चा में
दानिश कनेरिया (Danish Kaneria) की पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनके क्रिकेट करियर से जुड़े पुराने विवादों को भी याद दिलाया। लोगों ने स्पॉट फिक्सिंग मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जिन पर खुद गंभीर आरोप लग चुके हैं, उन्हें दूसरों को सलाह देने से पहले अपने अतीत पर भी नजर डालनी चाहिए। दानिश कनेरिया पाकिस्तान के सफल लेग स्पिनरों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 61 टेस्ट मैच खेलकर 261 विकेट हासिल किए थे। लेकिन वर्ष 2012 में स्पॉट फिक्सिंग मामले में दोषी पाए जाने के बाद इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। बाद के वर्षों में उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान फिक्सिंग से जुड़े मामलों को लेकर स्वीकारोक्ति भी की थी। इसी वजह से उनकी नई टिप्पणी पर कई लोगों ने उनके पुराने रिकॉर्ड को सामने रखकर सवाल उठाए।
पहले भी विवादित बयानों से बटोर चुके हैं सुर्खियां
यह पहली बार नहीं है जब दानिश कनेरिया (म) किसी बयान को लेकर चर्चा में आए हों। इससे पहले भी उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम में धार्मिक भेदभाव के आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि टीम के कुछ खिलाड़ी उनके साथ धर्म के आधार पर अलग व्यवहार करते थे और उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया गया था। उस समय उनके इन आरोपों पर भी काफी विवाद हुआ था। अब NEET छात्र आंदोलन पर की गई उनकी टिप्पणी ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है। एक तरफ कुछ लोग इसे व्यक्तिगत राय बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कई यूजर्स का मानना है कि किसी दूसरे देश के व्यक्ति को भारत के संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करते समय संतुलित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। आने वाले दिनों में यह विवाद और कितना बढ़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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