Up News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के पचेड़ा कलां गांव में कक्षा चार में पढ़ने वाली 10 वर्षीय छात्रा आयुषी की मौत ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। परिवार का आरोप है कि स्कूल में उस पर 10 रुपये चोरी करने का आरोप लगाया गया और इसके बाद शिक्षकों ने उसके साथ मारपीट की। घर लौटने पर बच्ची बेहद परेशान और रोती हुई दिखाई दी। कुछ ही देर बाद उसने घर में फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है, जबकि गांव के लोग भी इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
परिजनों का दावा- बच्ची ने कहा था, “मैंने चोरी नहीं की”
मृतक छात्रा के पिता अशोक राजपूत का कहना है कि उनकी बेटी ने घर आकर रोते हुए बताया था कि उसने किसी के 10 रुपये नहीं चुराए थे। बच्ची के अनुसार, उसे पैसे स्कूल में टेबल के नीचे पड़े मिले थे। परिवार का आरोप है कि बिना पूरी बात सुने शिक्षकों ने उस पर चोरी का आरोप लगाया और स्कूल में ही उसकी पिटाई कर दी। स्थानीय लोगों और कुछ बच्चों ने भी बताया कि आयुषी स्कूल से रोते हुए घर लौटी थी और मानसिक रूप से काफी आहत थी। पिता के मुताबिक, जब वह दोपहर में घर पहुंचे तो बेटी फंदे से लटकी मिली। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच में जुटी टीम
घटना की सूचना मिलने के बाद नई मंडी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित पिता की लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। सीओ नई मंडी सुनील कुमार के अनुसार, शिकायत में प्राथमिक विद्यालय के दो शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 107 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी तथ्यों की गहराई से जांच की जा रही है। स्कूल के शिक्षकों, कर्मचारियों और अन्य लोगों से भी पूछताछ की जाएगी ताकि घटना से जुड़े हर पहलू की सच्चाई सामने आ सके।
घटना के बाद शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों के साथ व्यवहार, अनुशासन के तरीकों और मानसिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी छात्र पर आरोप लगने की स्थिति में पूरी जांच और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई होनी चाहिए। छोटे बच्चों पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाना या उन्हें अपमानित करना उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। फिलहाल पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना की परिस्थितियां क्या थीं और जिम्मेदारी किसकी बनती है। वहीं परिवार और ग्रामीणों की मांग है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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