उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे के बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार अब इस पर सिर्फ प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि इसके निर्माण, बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अलग कानून लाने की योजना बना रही है। इस संबंध में सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने अपना पक्ष भी रखा है। सरकार का कहना है कि मौजूदा नियमों के बावजूद चाइनीज मांझा बाजार में पहुंच रहा है, इसलिए इसे पूरी तरह रोकने के लिए विशेष कानून की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
हाईकोर्ट में सरकार ने बताया कानून बनाने का प्लान
चाइनीज मांझे को लेकर दाखिल जनहित याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई चल रही है। इसी दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए नया कानून तैयार किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित कानून का नाम ‘यूपी लेथल मांझा (प्रोहिबिशन ऑफ मैन्युफैक्चर, सेल एंड यूज) एक्ट’ रखा जा सकता है। सरकार इस कानून में ऐसे प्रावधान जोड़ने पर विचार कर रही है, जिनके तहत जानलेवा मांझे से घायल होने वाले लोगों या पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी दिया जा सके। अदालत ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए सरकार से प्रभावी कदम उठाने को कहा है।
प्रतिबंध के बावजूद बाजार में कैसे पहुंच रहा मांझा?
हाईकोर्ट लगातार यह जानने की कोशिश कर रहा है कि जब चाइनीज मांझा पहले से प्रतिबंधित है, तब भी इसकी बिक्री और इस्तेमाल कैसे हो रहा है। अदालत ने संबंधित विभागों से इस बारे में जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि प्रतिबंधित मांझा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी बेचा जा रहा है। इस पर अदालत ने राज्य सरकार को जांच करने और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, चाइनीज मांझा सिंथेटिक धागे और कांच जैसी धारदार सामग्री से तैयार किया जाता है, जो पतंगबाजी के दौरान बेहद खतरनाक साबित होता है। इसकी वजह से हर साल कई लोग घायल होते हैं और पक्षियों की भी बड़ी संख्या में मौत होती है।
सड़क पर चलने वालों और पक्षियों के लिए बना खतरा
चाइनीज मांझा लंबे समय से दोपहिया वाहन चालकों, राहगीरों और पक्षियों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। कई मामलों में बाइक सवारों के गले में मांझा फंसने से गंभीर चोटें आई हैं, जबकि कुछ घटनाओं में लोगों की जान भी गई है। त्योहारों और पतंगबाजी के मौसम में ऐसे हादसों की संख्या बढ़ जाती है। यही वजह है कि सरकार अब केवल प्रतिबंध की बजाय एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है, जिससे निर्माण से लेकर बिक्री और इस्तेमाल तक हर स्तर पर सख्ती की जा सके। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होनी है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस कानून का मसौदा और इसके प्रावधानों की तस्वीर और साफ हो सकती है।
