देश में राशन वितरण प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नया प्रस्ताव सामने रखा है। इसके तहत अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थियों को राशन देने के नियमों में बदलाव किया जा सकता है। अभी तक योजना के पात्र परिवारों को हर महीने एक निश्चित मात्रा में अनाज दिया जाता है, लेकिन नए प्रस्ताव में परिवार की जगह उसके सदस्यों की संख्या को आधार बनाने की बात कही गई है। सरकार का मानना है कि इससे जरूरतमंद लोगों तक राशन का लाभ अधिक समान रूप से पहुंच सकेगा और वितरण व्यवस्था में संतुलन आएगा।
क्या बदल सकता है राशन का मौजूदा नियम?
वर्तमान में अंत्योदय अन्न योजना के तहत पात्र परिवारों को हर महीने 35 किलो अनाज मिलता है। प्रस्तावित व्यवस्था में प्रत्येक सदस्य के हिसाब से अनाज देने की बात कही गई है। यानी परिवार में जितने सदस्य होंगे, उसी आधार पर राशन तय किया जा सकता है। हालांकि एक परिवार को मिलने वाले कुल अनाज की अधिकतम सीमा पहले की तरह 35 किलो प्रति माह ही रखी जा सकती है। सरकार का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में छोटे और बड़े परिवारों के बीच प्रति व्यक्ति मिलने वाले अनाज में अंतर दिखाई देता है। नए नियम से इस अंतर को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
किन लोगों को हो सकता है फायदा?
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो बड़े परिवारों को राहत मिल सकती है। अभी कई ऐसे परिवार हैं जिनमें सदस्यों की संख्या अधिक है, लेकिन उन्हें भी उतना ही राशन मिलता है जितना कम सदस्यों वाले परिवार को। नई व्यवस्था से राशन का बंटवारा अधिक व्यवस्थित हो सकता है। इसके साथ ही सरकार का लक्ष्य यह भी है कि खाद्यान्न का लाभ वास्तविक जरूरत के अनुसार लोगों तक पहुंचे। विशेषज्ञों का मानना है कि सदस्य आधारित व्यवस्था से वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बन सकती है और लाभार्थियों के बीच समानता बढ़ सकती है।
अभी नहीं बदले हैं नियम, लोगों से मांगी गई राय
महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल यह केवल एक मसौदा प्रस्ताव है। सरकार ने इस पर आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। निर्धारित समय तक मिलने वाली राय और सुझावों की समीक्षा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तब इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसलिए राशन कार्ड धारकों को फिलहाल किसी बदलाव को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में यह एक बड़ा सुधार माना जाएगा और करोड़ों लोगों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
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