महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां शिवसेना (UBT) को एक ही दिन में बड़ा झटका लगा। पार्टी के 6 मौजूदा सांसदों ने खुले तौर पर बगावत करते हुए डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिंदे गुट का दामन थाम लिया। यह पूरा घटनाक्रम मुंबई स्थित वाईबी चव्हाण सेंटर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आया, जहां सभी सांसदों ने अपने नए राजनीतिक रुख का ऐलान किया। इस अचानक हुए बदलाव से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और इसे UBT के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
कौन-कौन सांसद हुए शामिल
शिवसेना UBT से अलग होकर शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर शामिल हैं। ये सभी सांसद पहले शिवसेना (UBT) के महत्वपूर्ण चेहरे माने जाते थे और पार्टी संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। बताया जा रहा है कि इन सभी को पहले से ही एक गुप्त स्थान पर रखा गया था और बाद में इन्हें सीधे मुंबई लाकर मीडिया के सामने पेश किया गया। इस घटनाक्रम ने विपक्षी खेमे में चिंता बढ़ा दी है और आगे और टूट की अटकलें तेज हो गई हैं।
शिंदे का बयान और राजनीतिक संदेश
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एकनाथ शिंदे ने सभी नए सांसदों का स्वागत किया और उन्हें “शिवसेना की ताकत” बताया। उन्होंने मंच से कहा कि “मेरे पास अब 6 टाइगर हैं”, जिसका सीधा इशारा नए शामिल हुए सांसदों की ताकत और राजनीतिक प्रभाव की ओर माना जा रहा है। इस बयान को सिर्फ एक टिप्पणी नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है, जो महाराष्ट्र की बदलती सियासी समीकरणों को दर्शाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आने वाले समय में लोकसभा और राज्य दोनों स्तर पर असर डाल सकता है।
सदस्यता पर क्या असर?
संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे मामले में दल-बदल कानून की अहम भूमिका होगी। नियमों के मुताबिक यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग होकर किसी अन्य गुट में शामिल हो जाते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से छूट मिल सकती है। इसी आधार पर माना जा रहा है कि इन 6 सांसदों की लोकसभा सदस्यता पर तत्काल कोई खतरा नहीं है। हालांकि, यह घटनाक्रम आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है और संसद में शक्ति संतुलन पर भी असर डाल सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि UBT नेतृत्व इस बड़े झटके का जवाब कैसे देता है।
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