ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से हटने का फैसला कर देश की राजनीति को नई चर्चा में ला दिया है। उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि वह लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे रहे हैं और नए नेता के चुने जाने तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। स्टार्मर ने बताया कि उन्होंने अपने फैसले की जानकारी राजा चार्ल्स तृतीय को भी दे दी है। संबोधन के दौरान उन्होंने माना कि पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे और उन्होंने सांसदों की राय का सम्मान करते हुए यह कदम उठाया है।
बढ़ते दबाव ने मुश्किल कर दिया था रास्ता
पिछले कुछ महीनों में कीर स्टार्मर (Keir Starmer) की सरकार कई विवादों और आलोचनाओं के घेरे में रही। टैक्स व्यवस्था, सामाजिक कल्याण योजनाओं और आर्थिक फैसलों को लेकर विपक्ष के साथ-साथ उनकी अपनी पार्टी के नेताओं ने भी सवाल उठाए। कुछ फैसलों को वापस लेने या उनमें बदलाव करने से सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा कुछ वरिष्ठ नेताओं की नियुक्तियों को लेकर भी बहस छिड़ी रही। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन मुद्दों के कारण पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग लगातार मजबूत होती गई।
एंडी बर्नहम को मिल रहा मजबूत समर्थन
लेबर पार्टी के नए नेता के तौर पर एंडी बर्नहम का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में शामिल माना जा रहा है। हाल ही में उत्तरी इंग्लैंड के एक महत्वपूर्ण उपचुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद उनका राजनीतिक कद और मजबूत हुआ है। पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके बर्नहम ने ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने हाल के दिनों में पार्टी के लिए नई दिशा और आम लोगों के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही है। माना जा रहा है कि आने वाले हफ्तों में पार्टी नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
10 साल में छठे प्रधानमंत्री का इस्तीफा, बढ़ी चिंता
कीर स्टार्मर (Keir Starmer) के इस्तीफे की घोषणा के साथ ही ब्रिटेन में राजनीतिक अस्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई है। पिछले एक दशक में कई प्रधानमंत्रियों के बदलने से देश की राजनीति लगातार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही है। लगातार बदलते नेतृत्व का असर आर्थिक नीतियों, निवेश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन की छवि पर पड़ सकता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि लेबर पार्टी किसे नया नेता चुनती है और क्या नया नेतृत्व देश में राजनीतिक स्थिरता वापस ला पाएगा।
