उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में नया मुद्दा सामने आया है। AIMIM ने समाजवादी पार्टी से मांग की है कि वह चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के लिए मुस्लिम चेहरे का ऐलान करे। पार्टी के प्रवक्ता शादाब चौहान ने कहा कि मुस्लिम समुदाय लंबे समय से सपा का समर्थन करता आ रहा है, इसलिए अब उसे सिर्फ वोट बैंक की तरह नहींदेखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात करती है, तो उसे नेतृत्व में भी इसकी झलक दिखानी चाहिए। इस मांग के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
PDA फॉर्मूले पर उठाए सवाल
शादाब चौहान ने सपा के PDA फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की बात करने वाली पार्टी को इन वर्गों को सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी भी देनी चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुस्लिम समाज ने कई सालों तक समाजवादी पार्टी का साथ दिया है। अब समय आ गया है कि उसे राजनीतिक भागीदारी भी मिले। AIMIM का कहना है कि सिर्फ चुनाव के समय समर्थन मांगना काफी नहीं है।
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने भी की मांग
इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी भी सपा से मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने अखिलेश यादव को पत्र लिखकर कहा कि राज्य में मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है, इसलिए उन्हें नेतृत्व में भी जगह मिलनी चाहिए। हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा इस मामले में सोच-समझकर फैसला लेगी, क्योंकि उसे सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है।
2027 चुनाव से पहले बदल सकते हैं समीकरण
उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति काफी हद तक सामाजिक और जातीय समीकरणों पर आधारित रही है। ऐसे में मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरे की मांग आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। AIMIM प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक को बनाए रखना चाहती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सपा इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और इसका 2027 के विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ता है।
