राजनीति में जब उत्साह अनुशासन की सीमा लांघने लगे, तो बड़े नेताओं को कड़ा रुख अपनाना ही पड़ता है। कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान रविवार को एक बार फिर उस समय सरेआम हो गई, जब खुद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। मौका था कर्नाटक कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के भव्य शपथ ग्रहण समारोह का, जहां उम्मीद तो पार्टी की एकजुटता दिखाने की थी, लेकिन मंच से जो कुछ हुआ उसने हाईकमान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए अध्यक्ष के स्वागत से ज्यादा वहां मौजूद भीड़ एक खास चेहरे के रंग में रंगी नजर आई, जिसने कांग्रेस अध्यक्ष को कैमरे के सामने बुरी तरह भड़का दिया।
नारों की गूंज और खरगे का ‘हाई वोल्टेज’ गुस्सा
दरअसल, कार्यक्रम की शुरुआत बेहद सामान्य तरीके से हुई थी, लेकिन जैसे ही नेताओं का भाषण शुरू हुआ, पंडाल में मौजूद कार्यकर्ताओं का एक बड़ा धड़ा बेकाबू हो गया। ये कार्यकर्ता कर्नाटक के नवनियुक्त मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में ‘डीके-डीके’ के नारे लगाने लगे। नारेबाजी इतनी तेज थी कि मंच पर बैठे नेताओं की आवाज दबने लगी। कार्यकर्ताओं के इस रवैये को देखकर मल्लिकार्जुन खरगे खुद को रोक नहीं पाए और माइक संभालते ही वे गुस्से से लाल हो गए। उन्होंने चिल्ला रहे कार्यकर्ताओं को सरेआम ‘यूजलेस फैलो’ (बेकार लोग) कह दिया। खरगे ने तीखे लहजे में कहा, “चुप रहो और बैठ जाओ! ऐसा लग रहा है जैसे पूरा देश तुम्हारे ही हाथ में आ गया है।” उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि यह पार्टी का आधिकारिक कार्यक्रम है, किसी एक नेता का व्यक्तिगत शक्ति प्रदर्शन नहीं।
कैमरे में कैद हुई बदतमीजी, अब गिरेगी गाज!
कांग्रेस अध्यक्ष का यह सख्त रूप देखकर कार्यक्रम में सन्नाटा पसर गया। खुद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी असहज हो गए और उन्होंने तुरंत खड़े होकर कार्यकर्ताओं को शांत रहने और बैठ जाने के इशारे किए। खरगे यहीं नहीं रुके, उन्होंने मंच से साफ चेतावनी दी कि पार्टी में अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ऐलान किया कि जो लोग भी इस कार्यक्रम में बाधा डाल रहे थे और हूटिंग कर रहे थे, उन सभी की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है। इन वीडियो फुटेज की बारीकी से जांच की जाएगी और अनुशासन तोड़ने वाले हुड़दंगियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। खरगे का यह रवैया साफ करता है कि पार्टी अब राज्यों में बेलगाम हो रहे कार्यकर्ताओं को कड़ा संदेश देना चाहती है।
कुर्सी की वो जंग, जिसने दिल्ली तक को हिला दिया
इस पूरे हंगमे के पीछे की असली कहानी कर्नाटक कांग्रेस की वो अंदरूनी राजनीति है, जो पिछले तीन सालों से सुलग रही थी। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद से ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर शह-मात का खेल चल रहा था। शुरुआती ढाई साल सिद्धारमैया को मिले, जबकि शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री के पद से संतोष करना पड़ा था। लेकिन परदे के पीछे तय हुए रोटेशन फॉर्मूले के तहत पिछले कुछ महीनों से दोनों गुटों में दबाव की राजनीति चरम पर थी। आखिरकार लंबी खींचतान के बाद इसी साल 28 मई को सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दिया और महज एक हफ्ते बाद डीके शिवकुमार ने राज्य की कमान संभाली। शिवकुमार के सीएम बनते ही उनके समर्थकों का उत्साह अब अति-उत्साह में बदल चुका है, जो इस कार्यक्रम में खरगे के गुस्से की वजह बना।
