उत्तर प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। नगीना लोकसभा सीट से फायरब्रांड सांसद और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया चंद्रशेखर आज़ाद को पुलिस प्रशासन ने उनके धामपुर स्थित आवास पर हाउस अरेस्ट (नज़रबंद) कर लिया है। इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद से ही उनके घर के बाहर और आसपास के इलाकों को भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ छावनी में तब्दील कर दिया गया है। घर की तरफ आने-जाने वाले हर रास्ते पर कड़ा पहरा है और हर संदेहास्पद गतिविधि पर खुफिया नजर रखी जा रही है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद से इलाके में राजनीतिक सरगर्मियां बेहद तेज हो गई हैं।
रैली का था बड़ा प्लान: नुमाइश मैदान में जुटने वाली थी भारी भीड़
दरअसल, बिजनौर के ऐतिहासिक नुमाइश मैदान में आज़ाद समाज पार्टी की तरफ से एक विशाल ‘सत्ता परिवर्तन रैली’ का आयोजन किया जाना था। इस रैली को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने हफ्तों से तैयारियां कर रखी थीं और भारी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन कार्यक्रम की शुरुआत होने से ठीक पहले ही पुलिस प्रशासन ने चंद्रशेखर आज़ाद की घेराबंदी कर दी, जिससे पूरी रैली खटाई में पड़ती नजर आ रही है। आज़ाद समाज पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई केवल और केवल उनकी इस महायात्रा और रैली को पूरी तरह से असफल करने के इरादे से की गई है।
चुप्पी साधकर बैठे आला अधिकारी
चंद्रशेखर आज़ाद जैसे बड़े राजनेता को उनके ही घर में कैद किए जाने के बाद से पूरे प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। हालांकि, इस बेहद संवेदनशील और बड़े मामले को लेकर पुलिस और जिला प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे सस्पेंस और ज्यादा गहरा गया है। आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि लोकतांत्रिक तरीके से रैली करने जा रहे एक सांसद को बिना किसी ठोस और लिखित कारण के इस तरह से क्यों रोका गया।
इन बड़े मुद्दों को लेकर चंद्रशेखर ने खोला था मोर्चा
आपको बता दें कि सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने हाल ही में उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर ‘सत्ता परिवर्तन यात्रा’ निकालने का एक बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने साफ किया था कि उत्तर प्रदेश में बढ़ती हुई बेरोजगारी, आसमान छूती बिजली की दरें, पेट्रोल-डीजल की बेतहाशा कीमतें, महिलाओं की सुरक्षा और सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर वे जनता के बीच जा रहे हैं। आज़ाद का दावा था कि वे इस यात्रा के जरिए सीधे जनता से संवाद करेंगे और आने वाले समय में राज्य की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचेंगे। लेकिन यात्रा के इस पहले ही पड़ाव पर प्रशासन के इस सख्त एक्शन ने यूपी की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है।
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