कुंडा से विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अदालत के हालिया फैसले ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हाई कोर्ट ने घरेलू हिंसा मामले में जारी समन को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही अदालत ने साफ कर दिया कि मामले की सुनवाई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में ही जारी रहेगी। इस फैसले के बाद राजा भैया को अब उसी अदालत में कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा। लंबे समय से चल रहे इस पारिवारिक विवाद में हाई कोर्ट का यह आदेश एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि मामला एक बड़े राजनीतिक चेहरे से जुड़ा हुआ है।
किस बात को लेकर अदालत पहुंचे थे राजा भैया?
राजा भैया ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दर्ज मामले की सुनवाई विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट की बजाय साकेत कोर्ट में होनी चाहिए। उनका तर्क था कि यह मामला सामान्य अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों की स्थापना की गई है और राउज एवेन्यू कोर्ट इस तरह के मामलों की सुनवाई करने के लिए सक्षम है। अदालत ने यह भी माना कि केवल अदालत बदलने की मांग कर देने से सुनवाई का मंच नहीं बदला जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना सभी पक्षों के लिए जरूरी है। इसी आधार पर राजा भैया की याचिका खारिज कर दी गई।
पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहा है कानूनी विवाद
राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच विवाद पिछले कई वर्षों से चर्चा में है। भानवी सिंह ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया था। उनके द्वारा दायर याचिका में वैवाहिक जीवन से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ राजा भैया ने भी पत्नी के खिलाफ तलाक की याचिका दाखिल कर रखी है। उन्होंने अपनी याचिका में वैवाहिक संबंधों में मतभेद और अन्य कारणों का उल्लेख किया है। दोनों पक्ष अदालत में अपने-अपने दावों को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद दोनों पक्षों की कानूनी लड़ाई आगे बढ़ेगी और आने वाले समय में अदालत में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सुनवाई हो सकती है।
अब आगे क्या होगा, सबकी नजर अगली सुनवाई पर
अपने आदेश में हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मिलने वाली राहतें भले ही नागरिक प्रकृति की हों, लेकिन कानून में ऐसे प्रावधान भी हैं जिनके उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसी कारण ऐसे मामलों की सुनवाई मजिस्ट्रेट अदालतों में की जाती है। अदालत ने मामले में उठाए गए अन्य कानूनी तर्कों को भी स्वीकार नहीं किया और कहा कि वर्तमान अदालत इस मामले की सुनवाई करने के लिए पूरी तरह अधिकृत है। अब राउज एवेन्यू कोर्ट में मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने पक्ष और सबूत पेश करेंगे। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल राजा भैया को इस मामले में कोई राहत नहीं मिली है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों तक की नजर अब अगली सुनवाई और उससे निकलने वाले संभावित परिणामों पर टिकी हुई है।
