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‘विकास से नहीं, तिकड़म से जीते जाते हैं चुनाव…’ मंच से ये क्या बोल गए BJP विधायक,वीडियो वायरल

भाजपा विधायक श्याम प्रकाश का बड़ा बयान—"विकास से नहीं, तिकड़म से जीते जाते हैं चुनाव।" जानें क्यों विधायक ने प्रधानों को दी 'साम, दाम, दंड, भेद' अपनाने की नसीहत और इसके पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी।

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों का तीर कब किस दिशा में चल जाए, कहा नहीं जा सकता। ताजा मामला हरदोई जिले का है, जहाँ सत्ताधारी दल के एक सीनियर विधायक ने मंच से कुछ ऐसा कह दिया है जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। गोपामऊ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश अपने बेबाक और अक्सर विवादित रहने वाले बयानों के लिए जाने जाते हैं। इस बार उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव जीतने के फॉर्मूले को लेकर एक ऐसा दावा कर दिया है, जिसने लोकतंत्र में विकास के दावों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। विधायक का यह बयान सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों में खूब सुर्खियां बटोर रहा है।

सम्मान समारोह में छलका विधायक का दर्द, दी ‘तिकड़म’ की सलाह

दरअसल, यह पूरा वाकया शनिवार को टड़ियावां ब्लॉक के झम्मन लाल स्मृति सभागार में देखने को मिला। मौका था ग्राम प्रधानों के कार्यकाल में 6 महीने की वृद्धि होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक सम्मान समारोह का, जहाँ विधायक श्याम प्रकाश मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। मंच से प्रधानों को संबोधित करते हुए विधायक का दर्द अचानक छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि चुनाव कभी भी सिर्फ विकास कार्यों के भरोसे नहीं जीते जाते, बल्कि इसके लिए ‘तिकड़म’ की जरूरत होती है। उन्होंने अपना खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र में कई विकास कार्य कराए और सड़कें बनवाईं, लेकिन इसके बावजूद जिन गांवों में काम हुआ, वहां से उन्हें उम्मीद के मुताबिक वोट नहीं मिले।

मंच से बोले— ‘साम, दाम, दंड, भेद’ सब अपनाओ, लेकिन कुर्सी मत छोड़ो

प्रधानों को चुनावी जीत का गुरुमंत्र देते हुए भाजपा विधायक ने मर्यादाओं की सीमा को थोड़ा और बढ़ा दिया। उन्होंने खुले मंच से नवनिर्वाचित और निवर्तमान प्रधानों को सलाह दे डाली कि अगला चुनाव हर हाल में उन्हें ही जीतना है। इसके लिए चाहे जो करना पड़े। विधायक ने कहा, “साम, दाम, दंड, भेद जो भी तिकड़म कर पाना कर लेना, लेकिन अगला चुनाव आपको ही जीतना है।” हालांकि, माहौल की नजाकत को समझते हुए उन्होंने बाद में अपनी बात को थोड़ा संभाला। उन्होंने प्रधानों से यह भी जोड़ दिया कि तिकड़म जरूर करें, लेकिन कोई ऐसा गलत काम न करें जिससे भाजपा सरकार का प्रधानों के ऊपर से विश्वास ही उठ जाए।

यूपी सरकार का बड़ा फैसला: प्रधान ही बने रहेंगे गांवों के ‘बॉस’

इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ग्रामीण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने सोमवार को यह साफ कर दिया कि निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही उनकी ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई, 2026 को समाप्त हो चुका था। अब नए आदेश के मुताबिक, ये निवर्तमान प्रधान नई ग्राम पंचायतों के गठन होने तक या अधिकतम छह महीने की अवधि तक पंचायतों के सामान्य प्रशासनिक कामकाज को संभालते रहेंगे, जिससे गांवों के विकास कार्य ठप नहीं होंगे।

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