भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए सांसद हर्ष मल्होत्रा को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। लंबे समय से इस पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी नेतृत्व ने आखिरकार उनके नाम पर मुहर लगा दी। वीरेंद्र सचदेवा का कार्यकाल पूरा होने के बाद बीजेपी आलाकमान ऐसे चेहरे की तलाश में था, जो संगठन और चुनावी रणनीति दोनों में मजबूत पकड़ रखता हो। हर्ष मल्होत्रा का नाम सामने आते ही दिल्ली बीजेपी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। पार्टी के भीतर उन्हें संगठन का अनुभवी और जमीनी नेता माना जाता है। खास बात यह है कि लोकसभा चुनाव जीतने के बाद कम समय में ही उन्हें दिल्ली संगठन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी से जोड़कर भी देख रहे हैं। बीजेपी अब दिल्ली में संगठन को और मजबूत करने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
पार्षद से सांसद और अब प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर
हर्ष मल्होत्रा का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प माना जाता है। उन्होंने स्थानीय राजनीति से शुरुआत की और धीरे-धीरे संगठन में अपनी मजबूत पहचान बनाई। साल 2012 में उन्होंने पूर्वी दिल्ली के वेलकम कॉलोनी वार्ड से निगम पार्षद का चुनाव जीतकर राजनीतिक पहचान बनाई थी। इसके बाद उन्हें दिल्ली नगर निगम में कई अहम जिम्मेदारियां मिलीं। साल 2015-16 में वह दिल्ली के मेयर भी रहे। संगठन में सक्रियता और कार्यकर्ताओं से लगातार जुड़े रहने के कारण पार्टी नेतृत्व का भरोसा उन पर लगातार बढ़ता गया। बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में उन्हें पूर्वी दिल्ली सीट से उम्मीदवार बनाया था, जहां उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को बड़े अंतर से हराया। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने उनके समर्थन में रैलियां की थीं। माना जाता है कि पूर्वी दिल्ली में उनकी मजबूत पकड़ और संगठनात्मक क्षमता ने उन्हें पार्टी नेतृत्व की पहली पसंद बनाया।
मोदी सरकार में मंत्री पद और अब नई राजनीतिक जिम्मेदारी
लोकसभा चुनाव में जीत के बाद हर्ष मल्होत्रा को केंद्र सरकार में भी जगह मिली। इससे साफ संकेत मिला था कि पार्टी नेतृत्व उन्हें भविष्य के बड़े नेताओं में शामिल मानता है। दिल्ली में बीजेपी ने लगातार तीसरी बार सभी सात लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की और इसमें हर्ष मल्होत्रा की जीत को भी अहम माना गया। पार्टी के अंदर उनकी छवि एक शांत लेकिन रणनीतिक नेता की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली बीजेपी को अब ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो संगठन, सरकार और जनता के बीच बेहतर तालमेल बना सके। हर्ष मल्होत्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने युवा और अनुभवी नेतृत्व के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। आने वाले समय में नगर निगम और विधानसभा चुनावों को देखते हुए उनकी भूमिका और ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाली है। पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में संगठन और ज्यादा सक्रिय होगा।
दिल्ली की राजनीति में बढ़ेगा मुकाबला, विपक्ष भी सतर्क
हर्ष मल्होत्रा की नियुक्ति के बाद दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस भी बीजेपी के इस फैसले पर नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी अब दिल्ली में आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ सकती है। हर्ष मल्होत्रा की खासियत यह मानी जाती है कि वे संगठन के साथ-साथ जनता के मुद्दों पर भी सक्रिय रहते हैं। पूर्वी दिल्ली में उनकी पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत नेटवर्क उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाता है। बीजेपी नेतृत्व को उम्मीद है कि वह दिल्ली में पार्टी की स्थिति और मजबूत करेंगे। वहीं विपक्ष के लिए भी यह संकेत है कि बीजेपी अब संगठनात्मक स्तर पर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती। आने वाले महीनों में राजधानी की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं और हर्ष मल्होत्रा की भूमिका इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में अहम रहने वाली है।
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