तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को उस समय बड़ा सियासी धमाका हो गया, जब AIADMK के विधायक एसाक्की सुबाया ने पार्टी और विधानसभा सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया। बीते दो दिनों में यह चौथा इस्तीफा है, जिसने राज्य की राजनीति को पूरी तरह से गरमा दिया है। सुबाया ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपना त्यागपत्र सौंपा और इसके बाद राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और विधायक भी पार्टी छोड़ सकते हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों ने AIADMK नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जबकि मुख्यमंत्री विजय थलापति की पार्टी TVK लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है और तमिलनाडु में जल्द कई सीटों पर उपचुनाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि TVK सरकार अब अपने सहयोगियों पर निर्भर रहने के बजाय खुद को ज्यादा स्थिर बनाने की कोशिश में जुटी हुई है।
फ्लोर टेस्ट से शुरू हुआ खेल
एसाक्की सुबाया उन बागी विधायकों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने 13 मई को विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान TVK सरकार के पक्ष में वोट किया था। उस समय से ही यह संकेत मिलने लगे थे कि AIADMK के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। सुबाया ने पूर्व मंत्रियों सी.वी. षणमुगम और एस.पी. वेलुमणि के गुट का समर्थन किया था और पार्टी नेतृत्व से उनकी दूरी लगातार बढ़ रही थी। इससे पहले सोमवार को AIADMK के तीन विधायक—मरगथम कुमारवेल, पी. सत्यभामा और एस. जयकुमार—भी इस्तीफा देकर TVK में शामिल हो चुके हैं। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक इन नेताओं को आगामी उपचुनाव में TVK के टिकट पर मैदान में उतारा जा सकता है। लगातार हो रहे दलबदल से साफ संकेत मिल रहे हैं कि विजय थलापति किसी भी तरह अपनी सरकार को पूरी तरह स्थिर और मजबूत बनाना चाहते हैं। यही वजह है कि TVK अब विपक्षी दलों के असंतुष्ट नेताओं को अपने साथ जोड़ने में तेजी दिखा रही है।
बहुमत से दूर थी TVK, लेकिन अब तेजी से बदल रहा गणित
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय थलापति की TVK ने 233 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 107 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों का आंकड़ा पार्टी अपने दम पर नहीं छू पाई थी। इसके बाद कांग्रेस ने TVK को समर्थन दिया और सरकार में शामिल हो गई। कांग्रेस को सरकार में दो मंत्री पद भी दिए गए। इसके अलावा वीसीके और आईयूएमएल जैसी पार्टियां भी TVK सरकार का हिस्सा बनीं, जबकि CPI और CPI(M) ने बाहर से बिना शर्त समर्थन देने का फैसला किया। शुरुआत में विपक्ष यह दावा कर रहा था कि इतनी गठबंधन वाली सरकार ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगी, लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। AIADMK के विधायकों के लगातार इस्तीफों से TVK की ताकत धीरे-धीरे बढ़ती नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इसी तरह समर्थन बढ़ता रहा तो विजय थलापति आने वाले समय में गठबंधन की मजबूरियों से काफी हद तक बाहर निकल सकते हैं।
विजय की रणनीति ने बढ़ाई विपक्ष की टेंशन
मुख्यमंत्री विजय थलापति शुरुआत से ही साफ संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी सरकार में अंतिम फैसला नेतृत्व का होगा और किसी तरह की अंदरूनी दबाव की राजनीति को ज्यादा जगह नहीं दी जाएगी। TVK के भीतर भी अनुशासन और मजबूत नेतृत्व पर लगातार जोर दिया जा रहा है। AIADMK में टूट के बाद अब विपक्षी खेमे में बेचैनी बढ़ गई है। कई नेताओं को डर है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में विपक्ष और कमजोर हो सकता है। दूसरी ओर TVK समर्थक इसे विजय की बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है और समर्थक दावा कर रहे हैं कि तमिलनाडु की राजनीति अब पूरी तरह नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। आने वाले दिनों में अगर और विधायक पार्टी बदलते हैं तो राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या TVK आने वाले उपचुनावों में अपनी स्थिति और मजबूत कर पाएगी या विपक्ष कोई बड़ा पलटवार करेगा।
