भारत की मेजबानी में मंगलवार को नई दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। दुनिया में बढ़ते तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बने हालात और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि चारों देशों के बीच बेहद सार्थक और उपयोगी बातचीत हुई है। उन्होंने साफ कहा कि समुद्री रास्तों में किसी भी तरह की रुकावट पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है, इसलिए जरूरी है कि जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहे। जयशंकर ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र अब सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार और स्थिरता का सबसे अहम केंद्र बन चुका है। ऐसे में QUAD देशों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
सप्लाई चेन और समुद्री सुरक्षा पर खास जोर
बैठक के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा वैश्विक सप्लाई चेन और समुद्री सुरक्षा को लेकर हुई। एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों से गुजर रही है। मैन्युफैक्चरिंग का कुछ देशों तक सीमित होना, जरूरी संसाधनों का केंद्रीकरण और समुद्री मार्गों में रुकावट जैसे मुद्दे पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि QUAD देशों को मिलकर ऐसे विकल्प तैयार करने होंगे जिससे किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि समुद्री सुरक्षा केवल रक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह आर्थिक स्थिरता और वैश्विक व्यापार से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने भरोसे और पारदर्शिता आधारित साझेदारी को सबसे मजबूत रास्ता बताया। जयशंकर ने कहा कि एक स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाए रखना चारों देशों की साझा जिम्मेदारी है और इसके लिए लगातार सहयोग जरूरी होगा।
चीन की बढ़ती गतिविधियों पर भी हुई चर्चा
नई दिल्ली में हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। दक्षिण चीन सागर से लेकर ताइवान स्ट्रेट तक चीन के आक्रामक रवैये को लेकर कई देशों में चिंता बनी हुई है। हालांकि QUAD देशों ने सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन बैठक के दौरान जिस तरह समुद्री सुरक्षा, नेविगेशन की स्वतंत्रता और रणनीतिक भरोसे की बात हुई, उससे साफ संकेत मिला कि यह समूह क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि रणनीतिक भरोसे को मजबूत करना आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर समुद्री मार्ग सुरक्षित नहीं रहेंगे तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक विकास पर सीधा असर पड़ेगा। इसी वजह से QUAD देशों का फोकस अब केवल कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी भी तेजी से बढ़ाई जा रही है।
अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी दिखाया एकजुटता का संदेश
बैठक में शामिल ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने QUAD को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चारों देश मिलकर एक शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए काम कर रहे हैं। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि हाल के वैश्विक घटनाक्रमों ने QUAD की जरूरत को और ज्यादा बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता और अहम खनिजों की उपलब्धता जैसी चुनौतियों से निपटने में QUAD अहम भूमिका निभा सकता है। जापान की ओर से भी क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई गई। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नई दिल्ली में हुई यह बैठक आने वाले समय में QUAD की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करेगी। खासकर होर्मुज संकट और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। भारत ने भी साफ संकेत दिया है कि वह केवल क्षेत्रीय शक्ति ही नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।
