बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और विधायक Humayun Kabir के एक बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय कुर्बानी के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा और जो पशु धार्मिक रूप से जायज हैं, उनकी कुर्बानी होती रहेगी। बयान में गाय, बकरे और ऊंट का भी जिक्र किया गया, जिसके बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने इसे भड़काऊ बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे धार्मिक अधिकारों से जोड़कर देखा। बकरीद से ठीक पहले आया यह बयान अब राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने दी सख्त प्रतिक्रिया
विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय मंत्री B. L. Verma ने हुमायूं कबीर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि देश किसी व्यक्ति विशेष की इच्छा से नहीं, बल्कि संविधान और कानून से चलता है। मंत्री ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और हर नागरिक को नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति कानून को चुनौती देने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है। केंद्रीय मंत्री का बयान सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि धार्मिक और राजनीतिक दोनों पहलू इसमें जुड़े हुए हैं।
हुमायूं कबीर ने सरकार पर साधा निशाना
अपने बयान में Humayun Kabir ने भाजपा सरकार और विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर कुर्बानी पर रोक लगाने की कोशिश की गई तो हालात खराब हो सकते हैं। उनका कहना था कि मुस्लिम समुदाय धार्मिक परंपराओं के मामले में पीछे नहीं हटेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब देश में स्लॉटर हाउस को लाइसेंस दिया गया है और बीफ का निर्यात होता है, तो फिर केवल बयानबाजी क्यों की जा रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया। कई संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है, जबकि समर्थकों का कहना है कि उन्होंने केवल अपने समुदाय की भावनाओं को सामने रखा है। फिलहाल मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर सामाजिक बहस का विषय बन चुका है।
वंदे मातरम और गाय पर भी दिया बयान
इसी दौरान केंद्रीय मंत्री B. L. Verma ने बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम गाने को अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम देशभक्ति का गीत है और इसे गाने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख Arshad Madani द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर भी उन्होंने टिप्पणी की। मंत्री ने कहा कि सिर्फ बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि लोगों को दिल से भी इस भावना को स्वीकार करना होगा। इन तमाम बयानों के बाद साफ है कि बकरीद से पहले धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों ने माहौल को काफी संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
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