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‘घबराने की जरूरत नहीं…’ PM मोदी की अपील के बाद सरकार ने खोले तेल भंडार के राज, पेट्रोल-डीजल पर आया बड़ा अपडेट

PM मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बाद केंद्र सरकार का बड़ा बयान सामने आया है। सरकार ने कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और LPG की कोई कमी नहीं है।

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प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचाने की अपील के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने देशवासियों के लिए बड़ा संदेश जारी किया है। सरकार ने साफ कहा है कि भारत में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी या कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और लोगों को किसी भी तरह की घबराहट में आने की जरूरत नहीं है। सोमवार को पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय हालात पर हुई इंटर-मिनिस्टीरियल ग्रुप (IGoM) की बैठक में अधिकारियों ने देश की ऊर्जा स्थिति को लेकर विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, भारत के पास पर्याप्त मात्रा में तेल और गैस का भंडार मौजूद है, जिससे आने वाले समय में सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बेहद कम है। सरकार ने यह भी कहा कि देश के नागरिक बेवजह पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं क्योंकि आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

भारत के पास कितना ईंधन भंडार?

सरकारी अधिकारियों ने बैठक में बताया कि भारत ने संभावित वैश्विक संकट को देखते हुए पहले से तैयारी कर रखी है। देश के पास लगभग 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस और करीब 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक उपलब्ध है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बावजूद भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई सामान्य बनी हुई है। अधिकारियों ने बताया कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर और चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक देश है। भारत 150 से ज्यादा देशों को पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात करता है और साथ ही घरेलू जरूरतों को भी पूरी तरह पूरा कर रहा है। सरकार ने यह भी बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर है, जिससे तेल आयात के लिए आर्थिक दबाव को संभालने में मदद मिल रही है।

आखिर क्यों की गई ईंधन बचाने की अपील?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील करते हुए कहा था कि दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में ईंधन की बचत करना केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं बल्कि राष्ट्रीय हित का विषय भी है। सरकार का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि लोग फिजूल ईंधन खर्च कम करेंगे तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा। सरकार ने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बावजूद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें अभी तक स्थिर बनी हुई हैं। इसके पीछे सरकार और तेल कंपनियों की रणनीति बड़ी वजह मानी जा रही है।

तेल कंपनियों को भारी नुकसान, फिर भी जनता को राहत

बैठक में यह भी बताया गया कि देश की तेल विपणन कंपनियां लगातार भारी वित्तीय दबाव झेल रही हैं ताकि आम लोगों पर महंगे तेल का बोझ न पड़े। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2026 की पहली तिमाही में उनकी रिकवरी में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद सरकार ने कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश जारी रखी है। अधिकारियों ने कहा कि भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और ईंधन का इस्तेमाल समझदारी से करें। सरकार का कहना है कि सामूहिक भागीदारी से ही देश वैश्विक आर्थिक संकट और बढ़ती तेल कीमतों के असर को कम कर सकता है।

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