पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार इलाके में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक चार मंजिला रिहायशी इमारत में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने कई फ्लैट्स को अपनी चपेट में ले लिया और इमारत के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग घरेलू सामान में लगी और तेजी से फैलती चली गई। दमकल विभाग को सूचना मिलते ही कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक हालात बेहद गंभीर हो चुके थे। इस हादसे में 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें कई लोग जिंदा जल गए।
अलग-अलग मंजिलों से मिले शव, बंद सीढ़ी बनी सबसे बड़ा खतरा
राहत और बचाव कार्य के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने हर किसी को झकझोर दिया। पुलिस और फायर टीम को इमारत के अलग-अलग हिस्सों से झुलसे हुए शव बरामद हुए। जानकारी के मुताबिक, एक शव पहली मंजिल से, पांच शव दूसरी मंजिल से और तीन शव सीढ़ियों के उस हिस्से से मिले, जिसे बंद पाया गया। माना जा रहा है कि आग लगने के बाद लोग जान बचाने के लिए सीढ़ियों की ओर भागे, लेकिन रास्ता बंद होने के कारण वे बाहर नहीं निकल सके। यही वजह रही कि मौत का आंकड़ा इतना बड़ा हो गया। फिलहाल पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है और क्राइम टीम मौके पर साक्ष्य जुटा रही है।
सौरभ भारद्वाज का हमला—‘राजधानी के लिए शर्मनाक’
इस दर्दनाक घटना पर आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इस हादसे को राजधानी के लिए शर्मनाक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस तरह की घटनाओं से कोई सबक नहीं ले रही है। भारद्वाज ने कहा कि पहले भी कई आग की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन गंभीर मुद्दों की बजाय दिखावे में ज्यादा व्यस्त है, जिससे आम जनता की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर सियासी बहस भी तेज हो गई है।
जांच जारी, लापरवाही या हादसा—बड़े सवाल कायम
फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट या घरेलू सामान में आग लगने की आशंका जताई जा रही है। फायर विभाग और दिल्ली पुलिस मिलकर पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर राजधानी में इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर संकरी गलियों और बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम वाले मकानों को लेकर। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इमारत में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह हादसा लापरवाही और सिस्टम की कमजोरी की ओर इशारा करता रहेगा।
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