Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव 2026 के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सामने आया है। भारत निर्वाचन आयोग ने दक्षिण 24 परगना जिले की फालटा विधानसभा क्षेत्र में हुए मतदान को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि इस सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों और सहायक बूथों पर फिर से मतदान कराया जाएगा। नई तारीख 21 मई 2026 तय की गई है, जिसमें सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोटिंग होगी। इस फैसले के बाद अब 4 मई को आने वाले नतीजों में फालटा सीट शामिल नहीं होगी। बाकी 293 सीटों के परिणाम तय समय पर घोषित किए जाएंगे, जबकि फालटा का रिजल्ट अब 24 मई को आएगा।
धांधली के आरोपों ने बढ़ाई सियासी गर्मी
फालटा सीट पर दोबारा मतदान का फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे कई गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। मतदान के दौरान कुछ बूथों पर गड़बड़ी और चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप लगे थे। सबसे बड़ा विवाद तब हुआ जब भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया कि ईवीएम मशीनों पर उनके चुनाव चिन्ह ‘कमल’ को टेप से ढक दिया गया था। इस आरोप के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और पार्टी ने तत्काल कार्रवाई की मांग की। वहीं, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर भी विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन चुनाव आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कदम उठाया और पूरी सीट पर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया।
पहले भी हुई थी री-वोटिंग
फालटा ही नहीं, इससे पहले भी राज्य के कुछ इलाकों में दोबारा मतदान कराया जा चुका है। 2 मई को दक्षिण 24 परगना की मगराहाट (पश्चिम) और डायमंड हार्बर सीटों के कुल 15 मतदान केंद्रों पर री-वोटिंग हुई थी। इन बूथों पर औसतन करीब 86.90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो काफी अधिक माना जा रहा है। मगराहाट पश्चिम के 11 बूथों पर 86.11 प्रतिशत और डायमंड हार्बर के 4 बूथों पर 87.60 प्रतिशत मतदान हुआ। इन घटनाओं के बाद चुनाव आयोग ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई और लगातार गश्त कराई गई, ताकि निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जा सके।
रिकॉर्ड मतदान के बीच बढ़ा सस्पेंस
इस चुनाव की खास बात यह भी रही कि राज्य में रिकॉर्ड स्तर पर मतदान हुआ है। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को हुए दो चरणों में औसत मतदान प्रतिशत करीब 93 फीसदी तक पहुंच गया, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक माना जा रहा है। इससे पहले देश में सबसे ज्यादा मतदान का रिकॉर्ड त्रिपुरा के नाम था, जहां 2013 में 91.82 फीसदी वोटिंग हुई थी। ऐसे में जहां एक ओर रिकॉर्ड मतदान ने लोकतंत्र की मजबूती दिखाई है, वहीं फालटा सीट पर दोबारा मतदान ने पूरे चुनाव में सस्पेंस बढ़ा दिया है। अब सबकी नजरें 21 मई की वोटिंग और 24 मई के नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि इस हाई-प्रोफाइल सीट पर आखिर जनता का फैसला किसके पक्ष में जाता है।
