Bargi Dam Accident: मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुए बरगी डैम क्रूज हादसे के बाद अब पीड़ितों की आपबीती सामने आने लगी है। इस हादसे में बची महिला सविता शर्मा ने प्रशासन और अस्पताल व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हादसे के बाद उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि किस अस्पताल में लाया गया है। सभी लोगों के मोबाइल फोन पानी में खराब हो चुके थे, जिससे किसी से संपर्क करना संभव नहीं था। महिला के अनुसार, हालात इतने खराब थे कि परिजन कहां हैं, कौन सुरक्षित है और कौन नहीं—इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी।
“कोई मदद नहीं, सिर्फ पूछताछ”—अस्पताल व्यवस्था पर सवाल
सविता शर्मा ने बताया कि हादसे के बाद अस्पताल में उनके पास कई लोग आए, जो नाम और जानकारी पूछ रहे थे, लेकिन असल मदद करने वाला कोई नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि घायल लोग अपने परिवार के सदस्यों के बारे में पूछते रहे, लेकिन कोई सही जानकारी देने को तैयार नहीं था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इलाज से पहले ही अस्पताल ने बिल थमा दिया। महिला के मुताबिक, चार लोगों को सिर्फ पेनकिलर देने के लिए 4700 रुपये का बिल बनाया गया। उस समय उनके पास पैसे भी नहीं थे क्योंकि सभी का सामान और नकदी पानी में भीग चुकी थी। बाद में उन्होंने अपने भाई से संपर्क कर किसी तरह बिल का भुगतान कराया।
रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, अब भी 4 लोग लापता
बरगी डैम में हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद से राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। प्रशासन ने शनिवार को रेस्क्यू ऑपरेशन और तेज कर दिया है। यह हादसा गुरुवार शाम उस समय हुआ था, जब क्रूज में कुल 41 लोग सवार थे। अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में तीन बच्चे और एक वयस्क शामिल हैं। पुलिस और बचाव दल लगातार पानी में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं, लेकिन अभी तक लापता लोगों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। राहत की बात यह है कि हादसे के तुरंत बाद 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।
मृतकों के शव घर भेजे गए
हादसे में जान गंवाने वालों के शव उनके गृह नगर भेजने की प्रक्रिया भी जारी है। प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह तीन पार्थिव शरीरों को जबलपुर एयरपोर्ट से फ्लाइट के जरिए दिल्ली भेजा गया। सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर शवों को उनके परिवारों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि, इस पूरे मामले में अब प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। पीड़ितों का कहना है कि हादसे के बाद उन्हें जिस तरह की मदद मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली। ऐसे में यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों को उजागर करने वाला मामला बनती जा रही है।
