जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कश्मीरी पंडित समुदाय की संघर्षगाथा को एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाया। मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि Kashmiri Pandits ने नरसंहार और विस्थापन जैसी भयावह परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद अपनी सांस्कृतिक पहचान को न सिर्फ बचाया, बल्कि उसे मजबूती से आगे बढ़ाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समुदाय ने भौतिक संपत्ति भले ही पीछे छोड़ दी हो, लेकिन अपने मूल्यों, परंपराओं और शिक्षा को हमेशा साथ रखा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास को लेकर चर्चा तेज है।
‘रेडियो शारदा’ बना पहचान की आवाज
कार्यक्रम के दौरान ‘द वेव्स ऑफ रेजिलिएंस: स्टोरी ऑफ रेडियो शारदा’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर उपराज्यपाल ने Radio Sharda की सराहना करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक रेडियो चैनल नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फैले कश्मीरी पंडितों को उनकी जड़ों से जोड़ने वाला एक मजबूत माध्यम है। उन्होंने बताया कि 2011 में शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म आज गीतों, कहानियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए परंपराओं को जीवित रखने का काम कर रहा है। इसके साथ ही यह युवा पीढ़ी को अपनी पहचान से जोड़ने और कलाकारों, लेखकों तथा विद्वानों को मंच देने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी जताई खुशी
उपराज्यपाल ने इस कार्यक्रम की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी साझा की। उन्होंने लिखा कि इस पुस्तक के विमोचन में शामिल होकर उन्हें बेहद खुशी हुई और उन्होंने इसके संस्थापक रमेश हांग्लू सहित सभी योगदानकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहलें न केवल इतिहास को सहेजने का काम करती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा भी देती हैं। उनके इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने कश्मीरी पंडित समुदाय के साहस और संघर्ष की सराहना की।
कृषि और जलवायु पर भी दिया बड़ा संदेश
इसी दिन Sher-e-Kashmir University of Agricultural Sciences and Technology में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में भी Manoj Sinha ने हिस्सा लिया। यहां उन्होंने जलवायु परिवर्तन और सतत कृषि पर जोर देते हुए वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं से एकजुट होकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2024-25 में देश का कृषि उत्पादन 357 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से काफी अधिक है। साथ ही बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह संकेत देता है कि सरकार कृषि क्षेत्र में नवाचार और विविधीकरण को प्राथमिकता दे रही है।
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