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AAP में भूचाल! राघव चड्ढा समेत 7 सांसद BJP में शामिल—सरकार का ‘टुकड़े-टुकड़े’ वार, सियासत में मचा घमासान

AAP के 7 बागी सांसदों को राज्यसभा से BJP में शामिल होने की मंजूरी मिलने के बाद सियासत गरमा गई है। जानिए सरकार की पहली प्रतिक्रिया और इस फैसले का राजनीतिक असर।

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आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए बड़ा राजनीतिक झटका सामने आया है, जब उसके सात बागी सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने को राज्यसभा सचिवालय ने औपचारिक मंजूरी दे दी। AAP ने इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था, लेकिन सचिवालय ने इसे खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद अब ये सभी सांसद आधिकारिक तौर पर बीजेपी संसदीय दल का हिस्सा बन चुके हैं। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ संसद के भीतर बल्कि पूरे देश की राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह बदलाव आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

इन नेताओं ने बदली पार्टी, अब BJP में नई पारी

जिन सात सांसदों ने AAP छोड़कर बीजेपी का दामन थामा है, उनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल हैं। इन सभी नेताओं के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी को राज्यसभा में मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह केवल दल-बदल नहीं बल्कि रणनीतिक कदम भी हो सकता है, जो आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करेगा।

सरकार का पहला रिएक्शन—‘टुकड़े-टुकड़े’ गठबंधन पर निशाना

इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की ओर से पहली प्रतिक्रिया केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन के फैसले का स्वागत किया। रिजिजू ने लिखा कि इन सातों सांसदों का बीजेपी में विलय स्वीकार कर लिया गया है और अब वे भाजपा संसदीय दल का हिस्सा हैं। उन्होंने इन सांसदों की तारीफ करते हुए कहा कि ये सभी लंबे समय से अनुशासित और गरिमापूर्ण व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। साथ ही उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए ‘टुकड़े-टुकड़े INDI गठबंधन’ को अलविदा कहने की बात भी कही। इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।

AAP के लिए बड़ा झटका, आगे क्या होगा असर?

इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। एक साथ सात सांसदों का पार्टी छोड़ना संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर बड़ा नुकसान माना जा रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या AAP इस झटके से उबर पाएगी या इसका असर आने वाले चुनावों में भी देखने को मिलेगा। वहीं बीजेपी के लिए यह एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उसकी संसद में पकड़ और मजबूत हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में विपक्षी एकता पर भी असर डाल सकता है और गठबंधन की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

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