Homeराजनीति“लोग जानते हैं यह गलत है…” परिसीमन बिल पर पूर्व CM फारूक...

“लोग जानते हैं यह गलत है…” परिसीमन बिल पर पूर्व CM फारूक अब्दुल्ला का बड़ा हमला, जानें क्या बोले?

परिसीमन विधेयक पर फारूक अब्दुल्ला का बड़ा बयान। सरकार पर साधा निशाना, कहा- लोगों को पता है यह गलत है। लोकसभा में वोटिंग से पहले बढ़ी सियासी हलचल।

-

परिसीमन विधेयक को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने इस बिल पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोगों को साफ समझ में आ रहा है कि यह फैसला सही नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह जनता की भावना को समझे और इस विधेयक पर दोबारा विचार करे। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अगर सरकार के पास पूरा समर्थन होता, तो उसे इस तरह के कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ती। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

“दो तिहाई बहुमत नहीं, इसलिए बदली रणनीति?”

फारूक अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि सरकार को पहले से अंदाजा था कि उसे इस बिल को पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलेगा। इसी कारण उसने पुराने प्रस्ताव को फिर से लाने की रणनीति अपनाई। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण फैसलों के लिए व्यापक समर्थन जरूरी होता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में सरकार के पास वह संख्या नहीं दिख रही है। अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि आगे सरकार क्या कदम उठाएगी, यह तो समय बताएगा, लेकिन जनता इस पूरे मामले को ध्यान से देख रही है और अपनी राय बना चुकी है।

जम्मू-कश्मीर के परिसीमन पर भी जताई नाराजगी

फारूक अब्दुल्ला ने सिर्फ मौजूदा विधेयक ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में हुए परिसीमन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वहां की प्रक्रिया भी सही तरीके से नहीं की गई और इसमें कई खामियां थीं। उनके मुताबिक, परिसीमन का उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिनिधित्व होना चाहिए, लेकिन अगर इसमें राजनीतिक फायदा देखा जाएगा तो इसका असर लोकतंत्र पर पड़ेगा। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी प्रतिक्रिया दी और उम्मीद जताई कि वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित हो। साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बोलते हुए उन्होंने ममता बनर्जी के लिए समर्थन जताया और उनके जीतने की कामना की।

लोकसभा में गणित और आगे की चुनौती

वर्तमान स्थिति में लोकसभा में इस विधेयक को पास कराना सरकार के लिए आसान नहीं माना जा रहा है। एनडीए के पास बहुमत जरूर है, लेकिन संविधान संशोधन के लिए जरूरी संख्या उससे अधिक होती है। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी कोशिश कर रहा है। अगर यह विधेयक पास होता है, तो लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 तक हो सकती है, जो देश की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल सकता है। यही कारण है कि यह मुद्दा सिर्फ एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले चुनावों और प्रतिनिधित्व के समीकरणों से भी जुड़ा हुआ है।

Read More-मीटिंग के बीच DM ने अचानक छोड़ दी कुर्सी… सामने बैठ गया ‘मटरू’, VIDEO देख लोग बोले- दिल जीत लिया!

 

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts