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नोएडा की फैक्ट्रियों के बाहर टंगे ये पोस्टर बने चर्चा का विषय, मजदूरों की सैलरी में क्यों बड़ा अंतर? जानें

नोएडा में मजदूरों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद नई न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) लागू कर दी गई है। जानिए अनस्किल्ड, सेमी-स्किल्ड और स्किल्ड वर्कर्स की सैलरी में अब कितना बड़ा अंतर आएगा।

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उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हब नोएडा में पिछले कुछ दिनों से जारी गतिरोध अब खत्म होता नजर आ रहा है। हजारों मजदूरों के सड़कों पर उतरने और काम ठप करने के बाद आखिरकार सरकार और मिल मालिकों को वेतन बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा। दरअसल, नोएडा की विभिन्न कंपनियों में काम करने वाले मजदूरों का आरोप था कि कमरतोड़ महंगाई के दौर में भी उन्हें महज 300 रुपये की दिहाड़ी पर काम करने को मजबूर किया जा रहा था। इस विरोध प्रदर्शन ने जब उग्र रूप लिया और पुलिस के साथ झड़पें हुईं, तो शासन प्रशासन हरकत में आया। अब नोएडा की तमाम फैक्ट्रियों के बाहर नए वेतनमान के पोस्टर लगा दिए गए हैं, जिससे मजदूरों में खुशी की लहर है। यह जीत उन कामगारों की है जो रात-दिन मशीनों के साथ पसीना बहाकर शहर की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देते हैं।

कैसे तय होती है आपकी ‘कीमत’?

क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही फैक्ट्री में काम करने वाले दो लोगों की सैलरी अलग-अलग क्यों होती है? इसके पीछे सरकार का ‘लेबर कोड’ काम करता है। किसी भी मजदूर की न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए तीन मुख्य बातें देखी जाती हैं। पहला है इलाका (Geographical Area), यानी नोएडा जैसे महंगे शहर में रहने का खर्च गांव के मुकाबले ज्यादा है, इसलिए यहाँ की मजदूरी भी अलग होगी। दूसरा पैमाना है अनुभव, जो सालों की मेहनत के बाद बढ़ता है। लेकिन सबसे खास है स्किल (हुनर)। इसी हुनर के आधार पर कर्मचारियों को चार श्रेणियों—अकुशल, अर्ध-कुशल, कुशल और अत्यधिक कुशल में बांटा गया है। इन श्रेणियों के जरिए ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि जिसे काम की जितनी बेहतर समझ है, उसे उसका उतना ही सही मेहनताना मिले।

कौन होता है ‘कुशल’ और कौन ‘अकुशल’?

अक्सर मजदूरों के मन में यह सवाल रहता है कि वे किस कैटेगरी में आते हैं। नोएडा के उद्यमियों के अनुसार, ‘अकुशल’ (Unskilled) वह है जो सहायक का काम करता है, जैसे सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना या पैकिंग करना। वहीं ‘अर्ध-कुशल’ (Semi-skilled) वह है जिसे काम की बुनियादी जानकारी है, जैसे धागा काटना या बटन टांकना। लेकिन असली खेल ‘कुशल’ (Skilled) वर्कर का है, जो मशीन को पूरी तरह ऑपरेट करता है और फाइनल प्रोडक्ट तैयार करता है। उदाहरण के लिए, एक गारमेंट फैक्ट्री में टेलर जो पूरा कोट सिलता है, वह कुशल माना जाएगा। इन लोगों की समय-समय पर ट्रेनिंग होती है और यह देखा जाता है कि वे बिना गलती के तकनीकी काम कर पा रहे हैं या नहीं। यही तकनीकी समझ उन्हें अकुशल से कुशल की श्रेणी में खड़ा करती है।

नया सैलरी स्ट्रक्चर

हरियाणा में हुई वेतन बढ़ोतरी के बाद नोएडा में भी जो मांग उठी थी, उस पर अब मुहर लग गई है। नए नियमों के मुताबिक, अब अकुशल मजदूरों को प्रतिदिन 783 रुपये मिलेंगे, यानी उनकी महीने की सैलरी लगभग 20,358 रुपये होगी। अर्ध-कुशल कामगारों को 868 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 22,568 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। वहीं, जो कर्मचारी अपने काम में पूरी तरह माहिर यानी कुशल हैं, उन्हें 954 रुपये प्रतिदिन की दर से 24,804 रुपये महीने का वेतन मिलेगा। सबसे ऊपर अत्यधिक कुशल लोग आते हैं, जिन्हें 1035 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 26,910 रुपये सैलरी दी जाएगी। यह नई दरें न केवल मजदूरों की आर्थिक स्थिति सुधारेंगी, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में हो रहे असंतोष को भी कम करेंगी।

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