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दोस्ती हो तो ऐसी! 37 लाख की कार को बनाया बेकरी, कहानी सुनकर भावुक हुए लोग

गुड़गांव में जर्मनी से लौटे वैज्ञानिक ने अपनी 37 लाख की कार को बेकरी स्टॉल में बदल दिया। दोस्त के स्टार्टअप “चटकारा ऑन व्हील्स” को सपोर्ट करने की यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

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गुड़गांव के सेक्टर 31 से सामने आई एक अनोखी कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। यहां एक शख्स अपनी महंगी लग्जरी कार की डिग्गी खोलकर केक और पेस्ट्री बेचता नजर आया, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए। करीब 37 लाख रुपये की इस कार को एक अस्थायी बेकरी स्टॉल में बदल दिया गया है। शुरुआत में लोगों को यह महज एक अजीब प्रयोग लगा, लेकिन जब इसके पीछे की असली वजह सामने आई तो हर कोई भावुक हो गया। यह सिर्फ एक बिजनेस आइडिया नहीं, बल्कि दोस्ती की ऐसी मिसाल है जिसने लोगों का दिल जीत लिया है।

 दोस्ती की मिसाल: जर्मनी से लौटे वैज्ञानिक का बड़ा दिल

इस कहानी के केंद्र में हैं अवधेश, जो पेशे से एक मेडिकल रिसर्च वैज्ञानिक हैं और पिछले कुछ सालों से जर्मनी में काम कर रहे हैं। छुट्टियों में भारत लौटे अवधेश ने आराम करने के बजाय अपने दोस्त की मदद करने का फैसला किया। उनके दोस्त ने “चटकारा ऑन व्हील्स” नाम से एक छोटा फूड स्टार्टअप शुरू किया था, लेकिन शुरुआत में ग्राहकों तक पहुंच बनाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में अवधेश ने अपनी लग्जरी कार को ही बेकरी स्टॉल में बदल दिया ताकि लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके और बिजनेस को पहचान मिल सके। उनकी इस सोच ने न सिर्फ दोस्त की मदद की, बल्कि एक मजबूत संदेश भी दिया कि सच्ची दोस्ती मुश्किल समय में साथ खड़े रहने से साबित होती है।

‘चटकारा ऑन व्हील्स’ बना चर्चा का केंद्र

गुड़गांव के सेक्टर 31 मार्केट में अब “चटकारा ऑन व्हील्स” लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है। कार की डिग्गी से बिक रहे केक, पेस्ट्री और अन्य बेकरी आइटम लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। खास बात यह है कि इस अनोखे सेटअप के कारण राह चलते लोग रुककर इस स्टॉल को देखने और कुछ खरीदने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस छोटे से स्टार्टअप को बड़ी पहचान दिला दी है। यूजर्स इस पहल की जमकर तारीफ कर रहे हैं और इसे दोस्ती और सपोर्ट का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं। कई लोग इसे ‘क्रिएटिव मार्केटिंग’ का शानदार तरीका भी कह रहे हैं।

 इंटरनेट पर मिल रही तारीफ, आगे का प्लान भी तैयार

अवधेश ने बताया कि यह पूरा सेटअप फिलहाल अस्थायी है और उनका मकसद सिर्फ अपने दोस्त के बिजनेस को शुरुआती दौर में मजबूत करना है। उनका लक्ष्य है कि अगले 5-6 महीनों में यह स्टार्टअप पूरी तरह स्थिर हो जाए और उनके दोस्त के लिए एक स्थायी आय का जरिया बन सके। इसके बाद वह वापस जर्मनी जाकर अपना रिसर्च कार्य जारी रखेंगे। इस बीच सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं। कोई इसे सच्ची दोस्ती की मिसाल बता रहा है तो कोई कह रहा है कि ऐसे दोस्त हर किसी को नहीं मिलते। इस कहानी ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों और साथ देने वाला दोस्त हो, तो छोटी शुरुआत भी बड़े सपनों को सच कर सकती है।

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