उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े अचानक लखनऊ पहुंचे। रविवार को हुए इस दौरे ने सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। माना जा रहा है कि यह दौरा महज औपचारिक नहीं, बल्कि आने वाले बड़े फैसलों की तैयारी का हिस्सा है। खासकर मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव को लेकर चर्चाएं पहले से ही तेज थीं, ऐसे में तावड़े की मौजूदगी ने इन अटकलों को और मजबूत कर दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर मौजूदा हालात और संभावित बदलावों पर फीडबैक लिया।
किन नेताओं से हुई मुलाकात, क्या निकले संकेत?
लखनऊ में अपने दौरे के दौरान विनोद तावड़े ने कई अहम नेताओं से मुलाकात की। इनमें प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक प्रमुख रहे। इसके अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही और धर्मपाल सिंह लोधी से भी चर्चा हुई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन बैठकों में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और आगामी चुनावी रणनीति पर गहराई से चर्चा हुई होगी। खास बात यह रही कि कुछ नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर व्यक्तिगत राय भी जानी गई, जिससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व हर पहलू को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहता है।
मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव की तैयारी?
तावड़े की इस सक्रियता को सीधे तौर पर संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन दोनों स्तर पर कुछ बड़े बदलाव हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति तैयार कर रही है, जिसमें नए चेहरों को मौका देने और कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है। इसी कड़ी में तावड़े सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे, जो इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भी लखनऊ आने की खबर है, जिससे यह संकेत मिलता है कि शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर गंभीरता से मंथन कर रहा है।
दिल्ली से लेकर लखनऊ तक जुड़ रहे सियासी तार
इस पूरे घटनाक्रम में एक और अहम बात सामने आई है कि कुछ नेताओं से मुलाकात दिल्ली में भी तय की गई है, जैसे सुरेन्द्र नागर। वहीं, सुरेश खन्ना से देर रात मुलाकात की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, स्वतंत्र देव सिंह इस समय लखनऊ में मौजूद नहीं हैं, जिससे उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इन तमाम बैठकों को जोड़कर देखा जाए तो साफ है कि बीजेपी यूपी में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर नई दिशा देने की तैयारी में है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में क्या बड़ा फैसला सामने आता है और इसका राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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