बिहार की राजनीति में लंबे समय तक अहम भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने अब राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पारी की शुरुआत कर दी है। शुक्रवार को उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। यह शपथ उन्हें सी पी राधाकृष्णन ने अपने कक्ष में आयोजित एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण समारोह में दिलाई। इस दौरान उन्होंने हिंदी में शपथ लेकर संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समारोह में कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिससे इस मौके की राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई।
शपथ समारोह में दिखी सियासी एकजुटता
शपथ ग्रहण के दौरान सत्ता और विपक्ष दोनों दलों के नेता मौजूद रहे। जेपी नड्डा, निर्मला सीतारमण और अर्जुन राम मेघवाल जैसे वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को खास बना दिया। वहीं, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, कांग्रेस नेता जयराम रमेश और भाजपा नेता राजीव प्रताप रूडी भी इस अवसर पर मौजूद रहे। इस तरह यह समारोह केवल औपचारिक नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीतिक संदेश भी छिपा नजर आया।
नीतीश कुमार जी देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। सुशासन को लेकर उनकी प्रतिबद्धता की हर तरफ सराहना हुई है। उन्होंने बिहार के विकास में अमिट योगदान दिया है। उन्हें एक बार फिर संसद में देखना बहुत सुखद होगा। सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्होंने कई वर्षों तक अपनी…
— Narendra Modi (@narendramodi) April 10, 2026
बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव तय
नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के राज्यसभा सदस्य बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। उनके इस कदम के बाद अब राज्य में मुख्यमंत्री पद खाली हो गया है। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) 14 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर सकता है। ऐसे में बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव आने वाले समय में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
पीएम मोदी का बयान बना चर्चा का केंद्र
राज्यसभा में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की एंट्री के बाद नरेंद्र मोदी का बयान चर्चा का विषय बन गया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि नीतीश कुमार देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं और सुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा सराही गई है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार का अनुभव संसद की कार्यप्रणाली को और मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री के इस बयान को राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में केंद्र और राज्य की राजनीति पर असर पड़ सकता है।
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