जोधपुर के पीपाड़ इलाके में पांच साल पुराना यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में फिर से सामने आया है। जुलाई 2021 में एक परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई कि आरोपी बेटे ने अपनी छोटी बहू के साथ सोते समय दुराचार की कोशिश की। बहू की चिल्लाहट पर सास मौके पर पहुंच गई और आरोपी भाग गया। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी ने इससे पहले अपनी बड़ी बहू के साथ भी इसी तरह की दरिंदगी की थी। बड़ी बहू ने यह घटना अपने पति को बताई थी, लेकिन लोक-लाज के डर से किसी और को नहीं बताया। जब छोटी बहू पर भी यह घटना हुई, तब परिवार ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया।
मां की निर्णायक गवाही
इस पूरे मामले में मां की भूमिका सबसे अहम साबित हुई। उसने अपने बेटे के खिलाफ पुलिस और अदालत में स्पष्ट गवाही दी। उसने अपनी बहुओं के लिए न्याय की राह चुनी और बेटे के खिलाफ कठोर सजा की मांग की। अदालत ने कहा कि मां की गवाही ने सच्चाई उजागर करने में मदद की। उन्होंने अपने फैसले में बताया कि अपराध के समय परिवार और सामाजिक दबाव के कारण अक्सर पीड़िता डर जाती है, लेकिन इस मां ने साहस दिखाया और इंसाफ दिलाया।
अदालत का फैसला और सजा
पॉक्सो विशेष अदालत के न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया। अदालत ने आरोपी को 10 साल की जेल और 85 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया। फैसले में न्यायाधीश ने रामचरितमानस की चौपाई भी लिखी, जिसमें कहा गया कि छोटे भाई की पत्नी, बहन और पुत्री जैसी महिलाएं सुरक्षित रहें और उन पर बुरी नजर डालने वाले को सजा मिलनी चाहिए।
सामाजिक संदेश और प्रतिक्रिया
यह मामला दिखाता है कि परिवार और समाज में न्याय के लिए कभी-कभी अपने प्रियजनों के खिलाफ भी कदम उठाना पड़ता है। मां ने अपने बेटे के प्रति मोह और लगाव छोड़कर इंसाफ का मार्ग अपनाया। स्थानीय समाज और कानून विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में साहस और सच्चाई बेहद जरूरी है। इस फैसले से समाज में संदेश गया कि महिलाओं के साथ कोई भी अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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