महंगाई से जूझ रहे आम लोगों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में CNG की कीमतों में दो रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें लागू होने के बाद अब CNG 84 रुपये प्रति किलो की जगह 86 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध होगी। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही ईंधन और परिवहन खर्च लोगों के बजट पर दबाव बना रहे हैं। नई कीमतें लागू होने के साथ ही निजी वाहन चालकों, ऑटो रिक्शा संचालकों, टैक्सी ड्राइवरों और छोटे व्यवसायों की लागत बढ़ने की संभावना है। CNG को पेट्रोल और डीजल की तुलना में किफायती ईंधन माना जाता रहा है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने इसकी बचत वाली छवि को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वाहन मालिकों का कहना है कि बार-बार होने वाली बढ़ोतरी से मासिक खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर उनकी आय और बचत पर पड़ रहा है।
लगातार बढ़ती लागत बनी वजह, वैश्विक हालात का भी असर
गैस वितरण क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार CNG की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण गैस की खरीद लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कई क्षेत्रों में आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे आयातित गैस की लागत बढ़ गई है। यही कारण है कि गैस कंपनियों को खुदरा कीमतों में संशोधन करना पड़ रहा है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि कंपनियों का दावा है कि बढ़ी हुई लागत का केवल सीमित हिस्सा ही उपभोक्ताओं पर डाला गया है, लेकिन आम लोगों के लिए यह अतिरिक्त खर्च भी चिंता का कारण बन गया है।
ऑटो और टैक्सी किराए में बढ़ोतरी की मांग तेज
CNG महंगी होने का सबसे बड़ा असर सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र पर पड़ सकता है। मुंबई में ऑटो रिक्शा और टैक्सी संचालकों ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती ईंधन लागत के कारण किराए में संशोधन की जरूरत महसूस हो रही है। परिवहन संगठनों का कहना है कि लगातार बढ़ रही सीएनजी कीमतों के बीच पुराने किराए पर संचालन करना कठिन होता जा रहा है। यदि किराए में बढ़ोतरी नहीं की गई तो वाहन चालकों की कमाई प्रभावित होगी। यही वजह है कि कई संगठनों ने परिवहन विभाग से न्यूनतम किराए में वृद्धि की मांग की है। दूसरी ओर यात्रियों को चिंता है कि यदि किराए बढ़े तो दैनिक यात्रा का खर्च और अधिक बढ़ जाएगा। खासकर उन लोगों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है जो रोजाना ऑटो और टैक्सी का उपयोग करते हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव परिवहन आधारित कई सेवाओं और वस्तुओं की लागत पर भी पड़ता है।
मई में कई बार बढ़े दाम, आगे भी बनी रह सकती है चिंता
मई का महीना CNG उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा नहीं रहा। इस दौरान कई शहरों में कीमतों में बार-बार संशोधन देखने को मिला है। मुंबई क्षेत्र में कुछ सप्ताह पहले भी सीएनजी के दाम बढ़ाए गए थे और अब एक बार फिर नई बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। इसी तरह दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी सीएनजी की कीमतों में लगातार इजाफा दर्ज किया गया है। कुछ ही दिनों के भीतर कई बार हुई बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में भी सीएनजी पहले की तुलना में काफी महंगी हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक गैस बाजार में स्थिरता नहीं आती है तो निकट भविष्य में कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल वाहन मालिकों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजर अगले मूल्य संशोधन पर बनी हुई है। आम उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि आने वाले समय में ऊर्जा बाजार में सुधार होगा और कीमतों में राहत मिल सकेगी।
Read More-UP Weather Alert: 90 KM/H की रफ्तार से आएगा तूफान! यूपी के इन जिलों के लिए बड़ी चेतावनी
