पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को उन रिपोर्ट्स को झूठा बताया, जिनमें कहा गया था कि ईरानी कच्चे तेल से भरा टैंकर, जो भारत आ रहा था, पेमेंट में दिक्कतों के कारण रास्ता बदलकर चीन की ओर बढ़ गया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और कंपनियों को अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता है। मंत्रालय ने कहा कि आने वाले महीनों में भारत की कच्चे तेल की जरूरत पूरी तरह से पूरी होगी।
चीन की ओर रुख बदलने की वजह
मंत्रालय ने बताया कि जहाज का गंतव्य बदलना आम प्रक्रिया का हिस्सा है। बिल ऑफ लैंडिंग में अक्सर संभावित पोर्ट के नाम लिखे जाते हैं ताकि शिपिंग ऑपरेशन में आसानी रहे। समुद्र में चलते हुए कार्गो जहाज अपने ऑपरेशनल निर्णयों के आधार पर गंतव्य बदल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यापारिक और तकनीकी फैसलों का हिस्सा है और इसका भारत की तेल आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ता। पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया कि पेमेंट संबंधी समस्याएं पूरी तरह झूठी हैं।
सी बर्ड और पिंग शुन टैंकर का मामला
हाल ही में खबर आई थी कि ईरानी गैस से भरा सी बर्ड टैंकर 2 अप्रैल को मंगलुरु पोर्ट पहुंच चुका है और अनलोडिंग जारी है। वहीं, जहाज ट्रैकिंग कंपनी ‘कप्लर’ ने कहा कि पिंग शुन नाम का अफ्रामैक्स टैंकर पहले गुजरात के वाडिनार की ओर था, लेकिन अब उसका गंतव्य चीन के डोंगयिंग की ओर बढ़ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रा के दौरान गंतव्य बदलना असामान्य नहीं है, यह सिर्फ व्यापारिक निर्णय और लॉजिस्टिक्स का हिस्सा है।
भारत और ईरानी तेल का ऐतिहासिक संबंध
भारत लंबे समय से ईरानी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है। मंत्रालय ने कहा कि हालिया निर्णय तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता पर आधारित हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी ढील के बाद भारतीय रिफाइनर ईरानी तेल की खेपों पर नजर रख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वित्तीय जोखिम और व्यापारिक शर्तें अब लॉजिस्टिक्स जितनी ही महत्वपूर्ण हो गई हैं। मंत्रालय ने साफ किया कि भारत की तेल आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और आने वाले समय में तेल की जरूरतें पूरी होंगी।
